कैप्शन: 4- अनाज मंडी में मशीन से सरसो की नमी जांच रहे निजी एजेंसी संचालक से गुहार लगाता किसान
कैप्शन: 5- अनाज मंडी में बिकने के लिए आई सरसो को देखते निजी एजेंसी संचालक
कैप्शन: 6- अमर सिंह किसान
कैप्शन: 7- जागेंद्र सिंह किसान
कैप्शन: 8- धर्मवीर किसान
निजी एजेंसियों के साथ मिलकर अधिकारी सरसों में नमी बता खरीदने से कर रहे मना
उसी फसल को निजी एजेंसियां खरीद रहीं चार हजार से 4700 रुपये क्विंटल में
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। सरकार किसानों को पागल बना रही है तथा अधिकारी निजी व्यापारियों के साथ मिलकर किसानों को लूटने का काम कर रहे हैं। सरसों की सरकारी खरीद करने की बजाय सरकार के अधिकारी नमी का बहाना बना सरसों की खरीद नहीं कर रहे हैं, ताकि निजी व्यापारी अपने मनमाने दामों पर किसानों की सरसों खरीदकर बाद में सरकार को समर्थन मूल्य पर बेच दें। पलवल अनाज मंंडी में सरसों बेचने के लिए कई दिनों से चक्कर काट रहे किसानों ने सरकार व अधिकारियों पर जमकर आरोप लगाए। किसानों का आरोप था कि जानबूझकर उनकी सरसों को नहीं खरीदा जा रहा है। शनिवार को भी पलवन अनाज मंडी में सरकारी खरीद के तौर पर मात्र 32 क्विंटल सरसों की खरीद की गई, जबकि जिस सरसों को सरकार ने खरीदने से मना कर दिया, निजी व्यापारियों ने उसी सरसों को 4700 रुपये तक में खरीदा।
पलवल अनाज मंडी में शनिवार को भी 500 क्विंटल से अधिक सरसों बिकने के लिए आई। सुबह से ही किसानों द्वारा लाई गई सरसों को मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों ने सरसों मेें नमी बताकर खरीदने से मना कर दिया। दो-तीन किसानों की छोटी-छोटी ढेरियां ही सरकारी समर्थन मूल्य पर सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदी गईं। इस तरह से समर्थन मूल्य पर केवल 52 क्विंटल सरसों खरीद की गई। पिछले 10 दिनों में अब तक केवल 63 क्विंटल सरसों खरीदी गई है, जबकि निजी एजेंसियों द्वारा 5 हजार क्विंटल के रूप में सरसों खरीद की जा चुकी है। सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर सरसों खरीदने से मना करने के बाद निजी एजेंसियों द्वारा सरसों की मशीन से जांच कर उसमें खासी नमी बताई जा रही है, ताकि किसान निराश हो जाएं।
मेरी सरसों को सरकार की एजेंसियों द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदने से मना कर दिया। बाद में निजी एजेंसियों ने भी उसमें काफी नमी बता दी तथा काफी हाथ जोड़ने के बाद भी केवल 5 हजार रुपये क्विंटल में उसकी सरसों खरीदी है। सरकार किसानों को पागल बना रही है। निजी एजेंसियों के साथ अधिकारी मिले हुए हैं। सरकार के मंत्री व विधायक समर्थन मूल्य दिलाने का दावा करते हैं, जबकि अधिकारी चूना लगा रहे हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। -अमर सिंह, किसान जल्हाका
अनाज मंडी में सरसों में नमी बताकर किसानों को लूटा जा रहा है। अधिकारियों का निजी एजेंसियों के साथ कमीशन तय है। यही कारण है कि हर किसान की सरसों में नमी बताकर खरीदने से मना किया जा रहा है। किसान इससे बरबाद हो रहे हैं तथा उन्हें लागत भी पूरी नहीं मिल रही है। यदि यही हाल रहा तो अगले साल से सरसों की बुवाई करना बंद कर देंगे। -जोगेंद्र सिंह, किसान दुर्गापुर
मैंने सरकार की तय नियमों के अनुसार पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया तथा अब एक सप्ताह घर पर सरसों को पूरी तरह से सुखाया है, फिर भी यहां मंडी में आने के बाद सरकारी एजेंसियां उसमें नमी बताकर खरीदने से मना कर रही हैं। सरकार किसानों को लूटने में लगी है। -धर्मवीर, किसान धतीर
मैं इस बारे में मंडी में पता करूंगा कि सरसों की सरकारी खरीद में क्या दिक्कत आ रही है। सरकार ने जो समर्थन मूल्य तय किया है, किसानों को पूरा मिलेगा। यदि किसी अधिकारी की इस संदर्भ में मिलीभगत मिली और जानबूझकर किसानों को लूटने का प्रयास किया तो कार्रवाई की जाएगी। -दीपक मंगला, विधायक पलवल