पलवल। नगर परिषद के गृहकर की फर्जी रसीद काटकर जारी की गई एनओसी का मामला अब मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंच गया है। जहां विपक्ष के पार्षद पहले से ही इसे उठा रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष के भी कुछ पार्षद सक्रिय हो गए हैं। पार्षदों ने नगर परिषद द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर की कापी, आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा मांगी गईं सूचनाएं व अन्य जानकारियां सीएम और डिप्टी सीएम तक पहुंचा दी हैं।
नवंबर 2020 में आरटीआई कार्यकर्ता धर्मेंद्र दलाल ने नगर परिषद ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत पलवल में जून 2016 में 146 नंबर से 270 नंबर की एनओसी की जानकारी मांगी थी। जिसमें एनओसी किसके नाम, कितना विकास शुल्क जमा हुआ और कितने वर्ग गज की जमीन की एनओसी हुई आदि शामिल थे। नगर परिषद द्वारा सूचना दी कि रिकार्ड चोरी हो गया था और कैंप थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था जबकि नगर परिषद कार्यालय शहर थाना क्षेत्र में आता है। धर्मेंद्र दलाल ने कैंप थाने से जानकारी मांगी तो वहां से जवाब मिला कि नगर परिषद की तरफ से कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया है। इन रिकार्डों के बाद धर्मेंद्र ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। जिसके बाद नगर परिषद अधिकारियों ने शहर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। उसके बाद पार्षद भी सक्रिय हो गए तथा उन्होंने एनओसी व अन्य मामलों की रसीदें निकालनी शुरू कर दीं। बाद में पार्किंग के मामले में भी पार्षदों द्वारा रिकार्ड निकाला गया, तो वह भी फर्जी निकला। सूत्रों के मुताबिक उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने तहसीलदार को नगर परिषद से जारी एनओसी के द्वारा जमीनों की रजिस्ट्रियों का सारा रिकार्ड मंगवाया है। जांच भी शुरू हो रही है। अब आरटीआई के द्वारा नगर परिषद की एनओसी के द्वारा 2014 से लेकर अब तक हुई जमीनों की रजिस्ट्रियों की भी जानकारी मागी गई है।
वर्जन-
यह मामला बहुत बड़ा है। कुछ भाजपा के नेता फर्जी तरीके से जमीनों की रजिस्ट्रियां कराकर प्रापर्टी डीलिंग का काम कर रहे हैं। यदि सरकार ने ऐसे लोगों का खुलासा कर कार्रवाई नहीं की, तो उन पर कार्रवाई करवाया जाएगा। - करण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता
ऐसा कोई मामला है तो उसकी जांच कराई जाएगी। यदि उसमें कोई भी अधिकारी शामिल मिला, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - मोनिका गुप्ता, जिला नगर आयुक्त