15.83 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई है खेल ढ़ाचे के विकास को
नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में बेहतर खेल सुविधाएं विकसित करने में हो रही देरी
हेमंत शर्मा
पलवल। 15.83 करोड़ रुपये से तैयार होने वाले खेल ढांचे का काम विभाग की ओर से पहले पीडब्ल्यूडी को सौंपा गया, इसके बाद इसकी जिम्मेदारी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण(एचएसवीपी) को दी गई और अब काम हरियाणा स्टेट रोड एंड ब्रिज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन(एचएसआरडीसी) को सौंप दिया गया है। बार-बार एजेंसी बदले जाने के कारण खेल सुविधाओं को विकसित करने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। इससे स्टेडियम में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों को फिलहाल पुरानी व्यवस्थाओं में ही मेडल के लिए अभ्यास करना पड़ रहा है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल सुविधाएं विकसित करने की कवायद खेल विभाग 7-8 माह से कर रहा है। इसके लिए खेल विभाग को 15.83 करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति भी मिल चुकी है। परियोजना के तहत चार एकड़ में फैले स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए सिंथेटिक रनिंग ट्रैक, बास्केटबॉल कोर्ट, टेनिस कोर्ट और कबड्डी, खो-खो व क्रिकेट मैदान तैयार किए जाने हैं।
देरी करने पर छीना काम
खेल ढांचे के निर्माण की शुरुआत में खेल विभाग ने पीडब्ल्यूडी से इसका एस्टीमेट तैयार करवाया था। इसके बाद किसी कारणवश काम की जिम्मेदारी एचएसवीपी को सौंप दी गई। एचएसवीपी के कहने पर खेल विभाग की ओर से करीब छह करोड़ रुपये की राशि भी उपलब्ध कराई गई, लेकिन काम में अधिक समय लगने के कारण अब विभाग ने एचएसवीपी से काम वापस लेकर इसकी जिम्मेदारी एचएसआरडीसी को सौंप दी है। इससे एक बार फिर एस्टीमेट और अन्य प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हुई है।
सड़क
पर दौड़ने से
चोट आशंका
स्टेडियम में बेहतर खेल सुविधाएं नहीं होने के कारण शहर के करीब 200 एथलीटों को सीमेंटेड सड़क और सड़कों पर दौड़ लगाने का अभ्यास करना पड़ रहा है। सीमेंटेड सतह पर लगातार दौड़ने से पैरों और एड़ियों में चोट व दर्द की समस्या का खतरा बना रहता है। वहीं सेना भर्ती की तैयारी कर रहे युवा वाहनों की आवाजाही के बीच फ्लाईओवर पर दौड़कर अभ्यास करने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में सिंथेटिक रनिंग ट्रैक और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होने से उन्हें सुरक्षित माहौल में अभ्यास का मौका मिलेगा और प्रदर्शन में भी सुधार आएगा।
वर्जन
खेल विभाग के निदेशक को पत्र भेजकर बजट उपलब्ध कराने के लिए लिखा गया है। बजट मिलने के बाद विभाग की ओर से कंसल्टेंट नियुक्त किया जाएगा। कंसल्टेंट खेल विभाग की आवश्यकताओं के अनुसार डीपीआर तैयार करेगा। डीपीआर के आधार पर टेंडर निकाला जाएगा और निर्माण कार्य शुरू होगा। पूरी प्रक्रिया में करीब तीन से चार महीने लग सकते हैं।
- राजकुमार, जेई, एचएसआरडीसी
स्टेडियम के विकास के लिए विभाग की ओर से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
- खुशवंत सिंह, जिला खेल अधिकारी