जिला स्तरीय सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की प्रतिदिन की लेट-लतीफी अस्पताल में आने वाले मरीजों पर भारी पड़ रही है। मौसम की तबदीली के चलते 15 अक्तूबर से अस्पताल का समय सुबह आठ बजे से बढ़कर नौ बजे कर दिया गया, लेकिन डॉक्टरों के लेट आने व समय से अपने कमरो में नही बैठने की आदत नहीं बदली।
जिसका खामियाजा मरीजों को घंटों डॉक्टरों के इंतजार में बैठकर भुगतना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर डॉक्टर समय से आना शुरू क्यों नहीं करते। अमर उजाला संवाददाता संजय राठौर ने मंगलवार को अस्पताल का जायजा लिया, पेश है रिपोर्ट :
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समय : सुबह 9:20 बजे
स्थान : कमरा नंबर-छह, सर्जरी ओपीडी कक्ष
डॉक्टर की कुर्सी खाली है, बाहर बैठकर दो महिलाएं चिकित्सक के आने का इंतजार कर रही है। दोनों महिलाओं का कहना है कि वे कल भी इसी तरह चिकित्सक के आने का इंतजार करके वापिस चली गई थी।
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समय : सुबह 9:40 बजे
स्थान : कमरा नंबर-20
यहां भी डॉक्टर की कुर्सी खाली है, कमरे के अंदर बैठकर मरीज डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे है। बाहर खड़े अस्पताल कर्मी ने बताया कि साहब अभी तक आए नहीं हैं।
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समय : सुबह 10 बजे
स्थान : कमरा नंबर-51
कमरे को तो महिला सफाई कर्मचारी ने खोल दिया, लेकिन महिला चिकित्सक तय समय के एक घंटे बाद भी कमरे में नही पहुंच पाई। बाहर महिलाएं उपचार के लिए डाक्टर साहिबा के आने का इंतजार कर रही है। जवाहर नगर कैंप निवासी चंद्रकांता ने बताया कि उन्हें महिला चिकित्सक से कुछ परामर्श लेना है और अपना उपचार करना है।