1500 रुपये तक बिक रही रजाइयां, 240 रुपये बिक रही रूई
सोमदेव आर्य
हथीन। नवंबर माह में मौसम की करवट के साथ ही रात के समय ठंड बढ़ने से लोगों ने सर्दी से बचने के इंतजाम करना शुरू कर दिए हैं। सर्दी का मौसम शुरू होते ही रजाई बाजार पूरे चरम पर पहुंच गया है। इस बार रजाई में रुई भरने, पिनाई की कीमतों सहित रूई, कपड़े व सिलाई के दाम में 20 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में ग्राहकों को सर्दी में भी पसीना आ रहा है।
रूई की दुकानों पर रजाई गद्दे की भराई का काम शुरू हो गया है। हालांकि कुछ लोग रजाइयों को दरकिनार कर मखमली कंबलों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं फिर भी लोगों का रुझान रजाइयों की तरफ भी देखने को मिल रहा है। हथीन, मंडकौला एवं उटावड के आसपास के क्षेत्र में भी सर्दी की दस्तक के साथ ही बाजारों व रूई पिनाई की दुकानों में रजाई भरवाने वालों व बनवाने वालों की भीड़ देखी जा सकती है। रजाइयों की मांग बढ़ने के चलते कारीगरों की संख्या में भी इजाफा हो गया है, तो वहीं कारीगर भी ग्राहकों को समय पर रजाई उपलब्ध करवाने के लिए मेहनत से जुट गए हैं। शहर में रजाई बनाने का काम करने वाले राहिल ने बताया कि नवंबर माह की शुरुआत में ही मीठी-मीठी ठंड की दस्तक के साथ ही लोगों ने घरों में रखी पुरानी रजाइयों को निकालकर उनकी रूई की पिनाई व भराई करवानी शुरू कर दी थी। ऐसे में रजाई भरने के कारीगरों की भी मांग जोर पकड़ने लगी है।
बाजार में पांच किस्म की रूई उपलब्ध
इस बार बाजार में रूई की कीमत 200 रुपये से लेकर 240 रुपये प्रति किलो तक है। जो कि रूई की गुणवत्ता व किस्म पर निर्भर करती है। बाजार में पांच किस्म की रूई उपलब्ध हैं, जिसमें फाइबर, देसी, रॉक्लोन, फ्लैट तथा कैशमिलोन मुख्य है, जबकि सबसे ज्यादा बिक्री फाइबर देसी रूई की हो रही है।
1000 से 1500 तक एक रजाई की कीमत
रजाई बनाने वाले कारीगर शकील ने बताया कि सामान्य तौर पर एक रजाई में तीन किलोग्राम से लेकर चार किलो ग्राम तक रूई भरी जाती है। इसमें 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से रूई पिनाई की कीमत है। इसके अलावा 80 से 100 रुपये कीमत रजाई में धागे की भराई के लिए तय की गई है। इसके अलावा रजाई के कवर व कपड़े को मिलाकर एक रजाई का मूल्य 1500 रुपये तक हो जाता है। रजाइयों की मांग को देखते हुए कारीगरों द्वारा एक दिन में 10 रजाई तक बनाई जा रही है।
दुकानदारों के वर्जन
राहुल-इस बार रूई की कीमतें 200 से 240 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जो पिछले साल से काफी ज्यादा हैं।
सुरेंद्र-बाजार में फाइबर, देसी, रॉक्लोन, फ्लैट और कैशमिलोन जैसे पांच प्रकार की रूई उपलब्ध हैं, जिनमें देसी और फाइबर की सबसे ज्यादा मांग है।
राहिल-ठंड शुरू होते ही लोग पुरानी रजाइयों की पिनाई और भराई करवा रहे हैं, जिससे कारीगरों की मांग बढ़ गई है।
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