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इलाज नहीं करने व मारपीट के मामले में वकील-डॉक्टर हुए आमने-सामने 

Sat, 18 Mar 2017 04:29 PM IST
palwal
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दुर्घटना में घायल एक वकील के पुत्र का उपचार नहीं करने और वकील के साथ मारपीट करने व जान से मारने की धमकी देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर वकील व पलवल के निजी अस्पतालों के डॉक्टर आमने-सामने हो गए हैं। वकील आरोपी डॉक्टरों की गिरफ्तारी पर अड़े हैं, वहीं डॉक्टरों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के बैनर तले अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।
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इस मामले में एक आरोपी डॉक्टर को पिछले दिनों पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और उसकी शुक्रवार को ही तीन दिन जेल में रहने के बाद जमानत हुई है। जबकि दो आरोपी डॉक्टर व अस्पताल के दो बाउंसर अभी पुलिस द्वारा फरार बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस मामले में आरोपी डॉक्टरों ने अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, जो कि अदालत ने नामंजूर कर दी।
 
गौरतलब है कि 13 नवंबर, 2016 को प्रकाश विहार कॉलोनी में रहने वाले टीकाराम हुड्डा वकील ने कैंप थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि उसके साढ़े चार वर्षीय पुत्र कार्तिक को सड़क दुर्घटना में चोट लगी थी। उसके मुंह व सिर से खून बह रहा था, जिसे लेकर वह राजमार्ग पर ही स्थित एपेक्स अस्पताल में उपचार के लिए गए, जहां डॉ. अंकुर व आशीष मौजूद थे। जल्दबाजी में पैसे न ले जाने के कारण उक्त डॉक्टरों ने उपचार करने से मना कर दिया तथा उसके द्वारा प्रार्थना करने पर मारपीट की और गाली गलौज की। डॉक्टरों ने चोट न होने का इनकार कर दिया। इसके बाद वह अपने पुत्र को सरकारी अस्पताल में ले गया, जहां उसकी एमएमआर काटी गई तथा सिर में चार जगह चोट दिखाई गई। 
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पुलिस में दी शिकायत में हुड्डा का आरोप था कि एपेक्स अस्पताल के इन डॉक्टरों व बाउंसरों की लापरवाही से उसके बेटे की जान पर खतरा बन गया। बाद में उसने निजी अस्पताल में डॉ. सचिन पर प्राथमिक उपचार कराया तथा उन्होंने चोट की पुष्टि की। पुलिस ने टीकाराम हुड्डा की शिकायत पर 13 नवंबर, 2016 को विभिन्न धाराओं में एपेक्स अस्पताल के डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. अंकुर, डॉ. आशीष, बाउंसर हेमराज व प्रवीण के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। बाद में पुलिस ने इस मामले की तफ्तीश की और जिला सिविल सर्जन से बोर्ड गठित करवाकर मामले की जांच करवाई।
 
सिविल सर्जन ने दी जांच रिपोर्ट
सिविल सर्जन ने पुलिस को दी जांच रिपोर्ट में कहा कि कार्तिक की चोट के मामले में एपेक्स अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही थी। अस्पताल में कार्यरत डॉ. आशीष का तो 21 अगस्त, 2012 को चिकित्सा संबंधी लाइसेंस भी खत्म हो चुका था, क्योंकि लाइसेंस पांच वर्ष के लिए वैध होता है। इसके अलावा सिविल सर्जन ने अपनी रिपोर्ट में एपेक्स अस्पताल के खिलाफ इस मामले में गलत तथ्य पेश करने व बिना चिकित्सीय लाइसेंस के ड्यूटी पर रखने पर भी सवाल उठाए। सिविल सर्जन की रिपोर्ट के आधार पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 की धारा जोड़ दी तथा एक आरोपी डॉक्टर अंकुर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया। बाद में अदालत ने उसे जेल भेज दिया।
 
मामले ने पकड़ा तूल
पुलिस द्वारा डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद वकील व पलवल के निजी अस्पतालों के डॉक्टर आमने-सामने आ गए। इस तरह से मामला दर्ज होने पर जहां आईएमए संस्था ने पलवल में अनिश्चितकालीन हड़ताल कर ताऊ देवीलाल टाउन पार्क के सामने धरने पर बैठ गए। वहीं वकीलों का कहना है कि डॉक्टर मनमानी करते हैं तथा लोगों के साथ इसी तरह पेश आते हैं। अब इस मामले को लेकर पुलिस व प्रशासन भी परेशान है।
 
एपेक्स अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही थी तथा उनकी लापरवाही के चलते बच्चे कार्तिक की जान जा सकती थी। डॉक्टर इस तरह से हड़ताल की पुलिस व प्रशासन पर दबाव बनाना चाहते हैं, लेकिन वकील ऐसा नहीं होने देंगे। पुलिस से मांग है कि आरोपी अन्य दोनों डाक्टरों व बाउंसरों को गिरफ्तार किया जाए। वरना वकील हड़ताल पर बैठ जाएंगे। वकील इस मामले को लेकर पहले भी हड़ताल कर चुके हैं।
- रविंद्र चौहान, पूर्व प्रधान जिला बार एसोसिएशन पलवल

 
हमने इस मामले में जिला प्रशासन को मांग पत्र दिया है कि पुन: निष्पक्षता से बोर्ड गठित कर मामले की जांच कराई जाए तथा निष्पक्ष जांच के आधार पर जो उचित कार्रवाई हो वह की जाए। फिलहाल आईएमए से जुड़े सभी डॉक्टर हड़ताल पर हैं।
 डॉ. गुलशन अरोड़ा, प्रधान आईएमए, पलवल
 
पुलिस द्वारा केवल वही कार्रवाई की जा रही है, जो उचित है। कानून के दायरे में ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किसी के भी दबाव में गलत कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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 विश्व गौरव, थाना प्रभारी, कैंप थाना 
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