कॉलेजों में 16 जुलाई से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होनी है। लेकिन होडल के एकमात्र सरकारी कॉलेज में प्राध्यापकों की कमी व जर्जर भवन के कारण इस साल भी विद्यार्थियों को कठिनाई उठानी पड़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा होडल के सरकारी कॉलेज में इस साल के सत्र को आरंभ करते हुए कॉलेज में बीए, बीसीए व कॉर्मस में दाखिला प्रक्रिया को आरंभ करते हुए कॉलेज के लगभग सभी कोर्सों में दाखिले की प्रक्रिया को लगभग पूरा कर लिया है।
लेकिन कॉलेज में विद्यार्थियों के बैठने के लिए कंडम घोषित भवन ही पढ़ाई के लिए बैठने का स्थान है। इसके साथ ही कॉलेज में प्रोफेसरों का भी अभाव है, कॉलेज में कुल 28 प्रोफेसर के पद सरकार द्वारा स्वीकृत हैं, जिनमें से सिर्फ तीन प्रोफेसर नियमित हैं, तथा चार की छह महीने के लिए डेपुटेशन पर नियुक्ति सरकार द्वारा की गई है। जबकि 21 पद खाली पड़े हैं।
कॉलेज के 4 अंग्रेजी के प्रोफेसर पदों में से किसी की भी नियुक्ति नहीं की गई है तथा 4 पद खाली पड़े हैं। इतिहास के 2 पदों में से 1 पद में से एक की डेपुटेशन पर नियुक्ति की हुई है तथा एक पद खली पड़ा हुआ है। गणित के 3 प्रोफेसर में से किसी की भी नियुक्ति नहीं की गई है। फिजिक्स के 2 पदों में से दोनों खाली पड़े हुए हैं। केमिस्ट्री के भी तीनों पदों पर एक की डेपुटेशन पर नियुक्ति की गई है तथा दो खाली पड़े हैं। कॉमर्स के 4 पदों में से एक की नियुक्ति की गई है तीन पद खाली हैं। सोसलॉजी का भी एक पद खाली पड़ा हुआ है। ज्योग्राफी के तीनों पदों पर भी एक की डेपुटेशन पर नियुक्ति की गई हैं, तथा दोनों ही खाली हैं। कंप्यूटर व फिजिक्स एजूकेशन के भी एक-एक पद खाली पड़े हुए हैं।
कॉलेज के प्रिंसिपल एमके गुप्ता का कहना है कि कॉलेज की समस्या के बारे में समय-समय पर सरकार व अधिकारियों को लिखित में कहा गया है, लेकिन उसके बावजूद भी कॉलेज में प्रोफेसर की कमी तथा इमारत की कमी को दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।