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सरसों तेल की बढ़ती कीमतों से दाल व सब्जी में तड़का लगाना मुश्किल

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होडल। सरसो तेल की बढ़ती कीमतों के चलते घरों में दाल व सब्जी के अंदर तड़का लगाना मुश्किल हो रहा है। महिलाओं का घर का बजट ही बढ़ती तेज की कीमतों ने बिगाड़ कर रख दिया है। लगातार बढ़ रही कीमतों से अब व्यापारी भी परेशान है। एक साल में ही सरसों के तेल की कीमत दो गुन हो गई है।
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गत वर्ष 90 रुपये प्रति किलो बिकने वाला सरसों का तेल इस कोरोना काल मे अब 180 प्रति किलो में बिक रहा है। लोगों का मानना है कि तेल की बढ़ती कीमतों के पीछे कालाबाजारी भी है। इसके लिए लोग सोशल मीडिया व मुख्यमंत्री के ट्विटर पर पोस्ट डालकर कालाबाजारी रोकने की भी मांग कर रहे हैं। युवा सत्यदेव ने मुख्यमंत्री के ट्विटर हैंडल पर सवाल किया है कि मुख्यमंत्री जी कोरोना महामारी में सरसों तेल व रिफाइंड पर चल रही जमाखोरी व कालाबाजारी कैसे रुकेगी।
सोशल मीडिया पर पूछा जा रहा है कि किसान की खेत से आई सरसों की फसल को मुनाफाखोरी के चलते समर्थन मूल्य से 800 रुपये अधिक खरीद लिया अब वह मुनाफ़े के चलते दो हजार रुपये अधिक मूल्य में बाजार में सरसों की फसल को बिक्री कर रहे है । सरसों या सरसों के तेल के दाम बढ़ने के पीछे बडी वजह जमाखोरी माना जा रहा है। इस कारोबार से जुडे लोगों की मानें तो होडल दक्षिण हरियाणा की सबसे बड़ी मंडी के आसपास ही सरसों की जमाखोरी की गई है। यह खेल इस मंडी के साथ-साथ जिले में अन्य स्थानों पर और चल रहा है। ऐसे ही खेल सरसों के तेल में है।
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जिला पलवल में 6 हजार, 500 हेक्टेयर में सरसों की पैदावार होती है पर मांग अधिक होने के कारण यहां अनाज मंडी में यूपी, राजस्थान से बडी मात्रा में सरसों की बिक्री के लिए आती है।
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200 रुपये प्रति किलो से ऊपर है रेट
शहर के व्यापारी दीपक कालड़ा व भारत भूषण कालड़ा का कहना है कि पिछले चार माह से सरसों के तेल व रिफाइंड तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं। अगर ब्रांड की बात करें तो सरसों और रिफाइंड तेल 170 रुपये लीटर से लेकर 200 रुपये और उससे भी ज्यादा दाम पर बिक रहा है। बाजार में महंगाई के चलते यह सब चल रहा है
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क्या है तेल का खेल
कारोबारी बसंत कुमार ने बताया कि मंडियों में 6600 से लेकर 7100 रुपये क्विंटल के हिसाब से सरसों की फसल बिक रही है। इस पर छह प्रतिशत जीएसटी और एक प्रतिशत मंडी शुल्क अलग से लगता है। अगर एक क्विंटल सरसों की फसल का तेल निकाला जाए तो 33 किलो तेल निकलता है। दो किलो खल जल जाती है। ऐसे में 65 किलो खल बचती है। थोक के रेट में 165 रुपये किलो तेल बिक रहा है। इस हिसाब से 33 किलो तेल की कीमत 5445 रुपये बनती है। वहीं 65 किलो खल 30 रुपये किलो के हिसाब से 1950 रुपये का बिक रहा है। पेराई 250 रुपये क्विंटल है। जबकि लोडिंग-अनलोडिंग में पांच रुपये किलो का चार्ज लग जाता है। ट्रांसपोर्ट का खर्च अलग से है। यही वजह है कि बाजार में सरसों का तेल महंगा बिक रहा है।
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