सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन एवं सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के तत्वाधान में विभिन्न यूनियनों के कर्मचारियों और मजदूरों ने सोमवार को ताऊ देवीलाल पार्क में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए मजदूर दिवस मनाया। इस अवसर पर मजदूर नेताओं ने कहा कि एक मई 1886 को अमेरिका के शिकागो शहर में लाखों मजदूरों ने आठ घंटे के कार्य दिवस सहित अन्य सुविधाएं हासिल करने के लिए एकत्रित होकर प्रदर्शन किया था।
उस समय से आज के दिन (एक मई) को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। उन्होंने बताया कि 1 मई 1886 को प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। इसमें कई मजदूर मारे गए और सैंकडों मजदूर घायल हो गए थे। 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में ऐलान किया गया कि 1 मई को मारे गए मजदूरों की याद में मजदूर दिवस मनाया जाएगा। भारत में इसकी शुरूआत 1 मई 1932 को की गई। कार्यक्रम में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा, सीआईटीयू, अखिल भारतीय किसान सभा, आगंनबाड़ी वर्कर्स व
हेल्पर्स यूनियन, मिड डे मिल, आशा वर्कर एवं रिटायर्ड कर्मचारी संघ के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर यूनियन नेताओं ने प्रदेश के श्रम राज्यमंत्री के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें मंत्री ने कहा कि मई दिवस का अपना कोई इतिहास नहीं है तथा मजदूर दिवस को विश्वकर्मा डे के साथ मनाने की बात कही। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार आज मजदूरों की आवाज दबाकर पूंजीपतियों के हित में माहौल बनाने का प्रयास कर रही है।
श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए कारखाना मालिक मजदूरों से 12 से 16 घंटे काम करा रहे हैं। निजी क्षेत्रों के साथ-साथ सरकारी क्षेत्रों में भी श्रम कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कहा कि सरकार मजदूर दिवस के इतिहास को खत्म करना चाहती है।
कार्यक्रम को मुख्य रूप से श्रीपाल भाटी, रमेशचंद, दरयाब सिंह, राजेश शर्मा, जितेंद्र तेवतिया, योगेश शर्मा, किशनचंद शर्मा, मोहरदत्त, सुभाष शर्मा, राजेंद्र सिंह, बिमलेश व सरोज संबोधित किया।