दोषी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना, पीड़िता को मिलेगी साढ़े सात लाख रुपये की मुआवजा राशि
जज ने कहा कि घर में ही बच्चियों का सुरक्षित न रहना शर्मनाक
डीएनए मिलान से आरोपी को सजा दिलाने में मिली मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बिना मां की बेटी का तीन साल तक यौन शोषण कर गर्भवती करने वाले आरोपी पिता को पलवल अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. प्रशांत राणा ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए पिता को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई है। आरोपी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया है। पीड़िता को साढ़े सात लाख रुपये मुआवजा देने के भी आदेश दिए गए हैं। सरकारी वकील हरकेश सिंह द्वारा पेश किए सबूतों व दलीलों पर न्यायाधीश ने यह निर्णय सुनाया है। मामले में सबूत एकत्रित करने वाली मामले की जांच अधिकारी एएसआई शोभा के कार्य की भी अदालत ने तारीफ की है। पीड़िता फिलहाल अपने छोटे-भाई बहनों के साथ अभी गुरुग्राम की एक एनजीओ के पास रह रही है। किशोरी से जन्मी बच्ची को एनजीओ द्वारा गोद दे दिया गया।
जानकारी के अनुसार, अक्तूबर 2020 में बहीन थाना अंतर्गत रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी ने महिला थाना पलवल में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी मां की चार साल पहले मौत हो गई थी। उसकी तीन छोटी बहनें व एक भाई है। मां की मौत के एक साल बाद ही उसके पिता ने उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी और रात के समय उसके साथ दुष्कर्म किया। पिता ने उसे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। उसके बाद आरोपी पिता ने कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया। करीब तीन साल तक यौन शोषण करने के कारण वह गर्भवती हो गई। वह चार माह की गर्भवती है और पिता दुष्कर्म करता है। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की जाती है। उसका पिता दादा-दादी को साथ नहीं रखता, ताकि उसकी हरकतों का उन्हें पता न चले। वह परेशान हो गई है और अपने पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराना चाहती है। गर्भवती होने पर उसने अपनी दादी को आपबीती बताई। दादी-दादा के साथ मिलकर मामले की शिकायत महिला थाना पुलिस को दी गई। पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी देने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। जांच अधिकारी एएसआई शोभा ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
डीएनए मिलान से सजा दिलाने में हुई आसानी
मामले में सरकारी वकील हरकेश सिंह ने केस की दमदार पैरवी की। आरोपी के खिलाफ साक्ष्यों को अदालत में पेश किया गया। हरकेश सिंह ने बताया कि पीड़िता से जन्मी बच्ची का डीएनए आरोपी से मिलाया गया, जो कि मैच हो गया। इससे आरोपी को सजा दिलाने में काफी मदद मिली। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. प्रशांत राणा ने सभी सबूतों व दलीलों को सुनने के बाद शुक्रवार को आरोपी को दोषी करार दिया। शनिवार को दोषी को मौत की सजा सुनाई गई और उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना किया गया। अदालत ने सरकार द्वारा पीड़िता को साढ़े सात लाख रुपये मुआवजा राशि देने के भी आदेश दिए हैं।
घर में ही बच्ची का सुरक्षित न होना बेहद शर्मनाक
मामले में सजा सुनाते समय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. प्रशांत राणा ने कहा कि अपने घर में ही बच्चियों का सुरक्षित न होना समाज के लिए बेहद शर्मनाक कृत्य है। जिस बाप के साये में बच्चे अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं, यदि वे ही उनके भक्षक बन जाएं तो समाज का क्या होगा। मां की मौत के बाद छोटे-छोटे भाई-बहनों की देखभाल करने वाली 12 साल से भी कम उम्र की बच्ची के साथ की गई दरिंदगी असहनीय है। तीन साल तक बच्ची के साथ दुष्कर्म व मारपीट पीड़ा को पीड़िता के अलावा कोई नहीं समझ सकता है। गर्भावस्था के दौरान भी बच्ची के साथ दुष्कर्म व मारपीट की गई, जोकि बेहद निंदनीय कृत्य है। ऐसे लोगों को समाज में रहने देना खतरे से खाली नहीं है। इस अपराध में दोषी को मौत से कम सजा देना अन्याय होगा। इस सजा से इस तरह की निर्लज मानसिकता रखने वाले लोगों को सीख मिलेगी।