नगर परिषद का टाऊन हॉल (जिसमें पार्षदों की बैठक होती हैं) जर्जर हालत में है। सीलन व बदबूदार हॉल में शहर के 31 कर्णधार शहर की विकास योजनाएं बनाते हैं। हालत यह है कि बाहर बरसात आने पर बैठक में बैठे पार्षदों व अधिकारियों की धड़कनें बढ़नी शुरू हो जाती हैं, कि कहीं छत से पानी न टपकना शुरू हो जाए।
नगर परिषद का कार्यालय अंग्रेजों के समय का बना हुआ है। वर्ष 1893 में परिषद कार्यालय का निर्माण कराया गया था। वर्ष 1990 में चले मंडल कमीशन के विरोध में आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रवियों ने परिषद कार्यालय में आग भी लगा दी थी। उसके बाद भी मौसम व अन्य आपदाएं झेलते हुए भवन जर्जर हालत में पहुंच चुका है। इस दौरान कार्यालय में कई बार आंतरिक विकास कार्य भी कराए गए, लेकिन भवन की हालत वैसी ही बनी हुई है।
वैसे तो समूचे परिषद कार्यालय की हालत जर्जर बनी हुई व इसे बेतरतीब तरीके से बनाया गया है। लेकिन परिषद का टाऊन हॉल तो बहुत ही जर्जर हालत में है। जगह-जगह से उखड़ा प्लास्टर, दीवारों पर आई सीलन, छत पर जमी काई व अंदर से उठती दुर्गंध इसकी हालत बयान करने को काफी हैं। लेकिन हॉल में बैठकर शहर के विकास पर चर्चा करते हुए पार्षदों व अधिकारियों की नजर शायद इस पर नहीं जाती है।
समय-समय पर विकास के नाम पर इस भवन में जितना पैसा लगाया गया है, उसमें तो नए भवन का निर्माण हो सकता है। करीब पांच वर्ष पूर्व मीनार गेट स्थित पुराने अस्पताल वाली जगह पर मार्केट कांपलेक्स व परिषद का कार्यालय बनाने की योजना बनी थी, लेकिन उस योजना का क्या हुआ न तो अधिकारी बताते हैं और न ही नेता। फिलहाल परिषद के ईओ का कहना है कि टाऊन हॉल की हालत सुधारना उनके एजेंडे में शामिल है।
टाऊन हॉल की हालत वाकई बदतर है। बोर्ड की पिछली बैठकों में लगातार इसमें सुधार करने की आवाज उठाई गई है, लेकिन कमजोर नेतृत्व के चलते इस पर कार्य नहीं हो सका। नए बोर्ड को इस तरफ ध्यान देते हुए इसके जीर्णोद्धार सहित शहर के विकास पर ध्यान देना चाहिए।
प्रेम सागर चावला, पूर्व नेता विपक्ष, नगर परिषद।
हाल ही में मैंने नगर परिषद का कार्यभार संभाला है। टाऊन हॉल की बदतर हालत की जानकारी है, इसका सोंदर्यीकरण एजेंडे में शामिल है। शीघ्र ही एमई से बात कर इसे सदन के अगले एजेंडे में शामिल करा कर इसके लिए बोर्ड की सहमति ली जाएगी।
जितेंद्र सिंह, ईओ, नगर परिषद, पलवल।