संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। हथिनी कुंड बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी का असर अब पलवल जिले में साफ दिखने लगा है। यमुना नदी का जलस्तर 613 फुट तक पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 615 फुट है। जलस्तर में बढ़ोतरी से नदी किनारे बसे खादर क्षेत्र के गांवों के खेतों में पानी घुसने लगा है। इससे किसानों को पिछले साल जैसी बाढ़ और फसल बरबादी की आशंका सताने लगी है। दिल्ली से कुछ किलोमीटर पहले पलवल जिले का खादर इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। बागपुर, दोस्तपुर, भोल्डा, सोलड़ा, राजुपुर, शेखपुर, अतवा, बिल्लोचपुर, काशीपुर, लहरपुर, फाटनगर, सदुआगढ़ी, हसनपुर, माहोली और इंदिरा नगर जैसे गांवों में सैकड़ों एकड़ फसल पानी में डूबने लगी है। यहां किसान धान, सब्जी और मवेशियों के चारे की फसलें उगाते हैं।
स्थानीय किसानों का कहना है कि 2023 में जलस्तर बढ़ने से खीरा, ककड़ी, लौकी, टमाटर, पेठा जैसी सब्जियों और ज्वार, बाजरा, ग्वार व ढेंचा जैसी फसलों को भारी नुकसान हुआ था। कई किसानों को मजबूरी में अधपकी फसल काटनी पड़ी थी। इस बार भी पानी उसी रफ्तार से बढ़ रहा है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन मोहित वशिष्ठ ने बताया कि 2022 और 2023 में तेज बहाव और लगातार कटाव के कारण तटबंध करीब 10 फीट की गहराई तक क्षतिग्रस्त हो गया था। अब कृषि भूमि और आबादी वाले क्षेत्रों को बचाने के लिए आठ पत्थर के स्टड बनाने का काम जारी है, जिस पर 2 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत आ रही है। इससे राजूपुर गांव समेत लगभग 100–150 एकड़ भूमि को बाढ़ और कटाव से सुरक्षा मिलेगी।
जिला उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बाढ़ से संबंधित सभी विभागों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। संभावित प्रभावित गांवों की सूची तैयार की जा रही है। आपदा की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लाने, चिकित्सा सहायता, पशु चारा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।