पांच जुलाई को हुए टीकरी ब्राह्मण दंगे के मामले में जांच में शामिल होने आए प्रभावित लोग बुधवार को लघु सचिवालय से बैरंग लौट गए। इसे सदर थाना पुलिस की लापरवाही कहा जाए या भूल, कि प्रभावित लोगों को जांच में शामिल होने के नोटिस तो जारी कर दिए गए। लेकिन जांच करने वाली एसआईटी के मुखिया केके संधू जांच के लिए आए ही नहीं थे।
मौके पर पहुंचे प्रभावित लोगों को बाद में पुलिस अधिकारियों ने यह कहकर लौटा दिया कि शीघ्र ही जांच के लिए गठित एसआईटी के अधिकारी आएंगे। उस समय उन्हें बुला लिया जाएगा। मामले में हाईकोर्ट
में अगली सुनवाई पांच जुलाई को होनी है।
पांच जुलाई 2015 गांव टीकरी ब्राह्मण में मामूली से विवाद ने सांप्रदायिक झगड़े का रंग अख्तियार कर लिया था। जिसमें दोनों पक्षों से दर्जनों लोग घायल हुए थे व कई घरों को आग के हवाले कर दिया था। हालाकि दंगे की आग तो उसी दिन शांत हो गई, लेकिन मामला अभी तक हाईकोर्ट में विचाराधीन है। मामले में समुदाय विशेष के लोगों ने जिला प्रशासन पर जांच में भेदभाव का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। जिसमें 22 अप्रैल 2016 को हाईकोर्ट ने एडीजीपी केके संधू को जांच कर पांच जुलाई को अदालत को रिपोर्ट करने के आदेश दिए थे।
-इससे पूर्व उनकी अगुवाई में एसआईटी की टीम जांच कर रही थी। एडीजीपी संधू का अगुवाई में बनने वाली एसआईटी ने अभी चार्ज नहीं लिया है। जिला पुलिस व प्रशासन की ड्यूटी है, कि लोगों में परस्पर सहयोग का माहौल बना रहे। दोनों पक्षों को आपसी शांति व सौहार्द बनाए रखने के लिए बुलाया गया था।
-ममता सिंह, आईजी, रेवाडी रेंज।
-न्याय ना मिलने के चलते दंगा प्रभावित लोगों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। 22 अप्रैल को हाईकोर्ट ने मामले में एडीजीपी केके संधू को जांच करने के आदेश दिए थे। सदर थाना पुलिस ने प्रभावित लोगों को पेश होने के लिए नोटिस जारी किए थे। यहां आकर पता चला कि संधू साहब ने अभी जांच शुरू ही नहीं की है। मामले में अगली सुनवाई पांच जुलाई को होनी है।
-युनूस अहमद, प्रदेश अध्यक्ष, मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन।