गांव बामनीखेड़ा में रामसहाय उर्फ कलुआ की बेरहमी से गला रेतकर हत्या किए जाने से एक बार फिर ग्रामीणों का दर्द उभर आया। ग्रामीणों का कहना है कि तीन हत्याओं के राज पहले भी पुलिस की फाइलों में दफन हैं। एक मामले में तो 15 साल बाद भी पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है।
बृहस्पतिवार को घटनास्थल पर गांव के लोगों व सरपंच महावीर शर्मा ने बताया कि पहले भी इसी प्रकार तीन हत्याएं हो चुकी हैं, जिनमें वर्षों बीतने के बावजूद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पुलिस एक भी मामले का अभी तक खुलासा नहीं कर पाई है।
सरपंच महावीर शर्मा व पुलिस डायरी में दर्ज मामलों के अनुसार, 6 फरवरी 2001 को गांव निवासी हृदयराम पुत्र फूलसिंह की अज्ञात लोगों ने हत्या की, जिसमें पुलिस ने मामला तो दर्ज किया, लेकिन 15 वर्ष बीतने के बाद भी पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में असफल रही। हत्या की दूसरी अनसुलझी वारदात 10 दिसंबर 2010 को हुई, जिसमें हसनपुर मार्ग पर रहने वाले 35 वर्षीय परशुराम पुत्र तुलसीराम की हत्या कर दी गई।
इसी प्रकार 4 सितंबर 2011 को गांव निवासी 50 वर्षीय मूलचंद पुत्र शिवचंद अपनी पत्नी के साथ प्लॉट पर सोया हुआ था। मूलचंद की गला रेतकर हत्या कर दी गई। सभी मामलों में पुलिस ने अनट्रेस रिपोर्ट लगाकर फाइलें बंद कर दी हैं।