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Palwal News: हाईवे की दीवारों व फुटपाथ पर पाथे जा रहे गोबर के उपले

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शहर की सुंदरता हो रही खराब, उपले पाथे जाने से कमजोर हो जाती है रिटेनिंग वॉल



पलवल। दिल्ली-मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित पृथला, बघौला, अलावलपुर, कुसलीपुर गांव के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग के आंशिक ऊंचाई वाली रिटेनिंग वॉल की ढाल पर बड़ी मात्रा में गोबर के उपले पाथे जा रहे हैं। इससे न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि सड़क सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

केंद्र सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से शहर और हाईवे की सुंदरता बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे है। इसके तहत हाईवे के दोनों ओर रिटेनिंग वॉल, हरियाली और अन्य सौंदर्यीकरण के कार्य किया जा रहा है। लेकिन जिले के कई गांवों में रिटेनिंग वॉल की ढाल पर ग्रामीण महिलाएं बड़ी संख्या में गोबर के उपले पाथ रही हैं, जिससे दीवार की सतह और सुंदरता दोनों की खराब हो रही है।
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एनएचएआई के कर्मचारियों का कहना कि उन्होंने कई बार गांव की महिलाओं को समझाया और रिटेनिंग वॉल की ढाल पर उपले न पाथने की अपील की, लेकिन इसका कोई स्थायी असर नहीं हुआ। जब भी कर्मचारी मौके पर जाकर उपलों को हटाने और महिलाओं को उपले पाथने से रोकने का प्रयास करते हैं, तो गांव की महिलाएं एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करने लगती हैं। इससे कर्मचारियों को अपना काम बीच में ही छोड़ना पड़ता है।
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एनएचएआई अधिकारों का कहना है कि रिटेनिंग वॉल हाईवे की सुरक्षा और मजबूती के लिए बनाई जाती है। उस पर इस तरह कार्य करने से हाईवे की सुंदरता खराब हो रही है और दीवार भी कमजोर हो सकती है, जिससे भविष्य में हादसों का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, महिलाओं का कहना है कि गांव में गोबर के उपले पाथने के लिए कोई निर्धारित या खाली जगह उपलब्ध नहीं है, जिस कारण उन्हें मजबूरी में हाईवे के फुटपाथ और ढाल पर उपले पाथने पड़ते हैं। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि गोबर के उपले उनके घरेलू ईंधन का मुख्य साधन हैं और कई परिवारों की आजीविका भी इन्हीं पर निर्भर है।
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