40 दिनों में 16वीं मौत, हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण फैलने से गांव में भय का माहौल
पोस्टमार्टम और सैंपल जांच के बाद वास्तविक कारण का चलेगा पता
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। छांयसा गांव में मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। शनिवार की रात एक और मरीज की मौत हो गई। पीड़िता आर्शीदा (35) ने नलहड़ मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान आखिरी सांस ली। गांव में पिछले 40 दिनों में यह 16वीं मौत है।
जानकारी के अनुसार पता चला है कि 24 फरवरी को आर्शीदा का हेपेटाइटिस बी टेस्ट नेगेटिव आया था, लेकिन 28 फरवरी को अचानक उल्टी की शिकायत के बाद नूंह के निजी अस्पताल ने सैंपल गुरुग्राम की लैब को भेजा। रिपोर्ट में आर्शीदा पॉजिटिव पाई गई। इसके बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। रविवार को डॉक्टरों की पांच सदस्यीय टीम ने पोस्टमार्टम किया। साथ ही ब्लड व यूरिन सैंपल फोरेंसिक साइंस लैब भौंडसी, आईसीएमआर पुणे, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी दिल्ली और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल को जांच के लिए भेजा।
गांव में हेपेटाइटिस बी, सी और ए के लगभग 50 मामले सामने आ चुके हैं। फरवरी के पहले सप्ताह से ही संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि, सिविल सर्जन सत्येंद्र वशिष्ठ ने पुष्टि की कि पांच मौतें हेपेटाइटिस बी और सी से हुई हैं। अन्य मौतों के कारण अलग-अलग हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 200 से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई, लेकिन संक्रमण का सिलसिला नहीं रुका। जिला उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि एनर्जी ड्रिंक के अधिक सेवन और असुरक्षित इंजेक्शन के कारण संक्रमण फैल रहा है। मृतक के परिवार सहित अन्य ग्रामीणों के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे। गांव में भय का माहौल है।
स्थानीय विधायक मोहम्मद इसराइल चौधरी ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से 24 घंटे आपातकालीन सेवाओं का प्रबंध करने और मृतकों के परिजनों को उचित सहायता राशि देने की मांग की है। स्वास्थ्य और प्रशासनिक टीमें लगातार गांव में जांच और टीकाकरण कर रही हैं, लेकिन मौतों का सिलसिला रुक नहीं रहा है। ग्रामीण आंशिक राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं और प्रशासन से तेज कदम उठाने की अपील कर रहे हैं ताकि इस भयावह स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके।