एंटी करप्शन ब्यूरो फरीदाबाद ने किया मुकदमा दर्ज, पलवल में भी कर्मचारियों में हलचल
- साल 2008 में पलवल में भी कंपनी ने कर्मचारी कराए थे भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी देने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो फरीदाबाद ने मुकदमा दर्ज किया है। एसीबी ने कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली कंपनी व उस समय तैनात बिजली अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमा दर्ज होने से पलवल में कार्यरत कर्मचारियों में हलचल है, क्योंकि उक्त कंपनी ने पलवल में भी कर्मचारी भर्ती कराए थे। मामले में सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांग कर शिकायत भी हो चुकी है, परंतु उसके बावजूद कर्मचारियों को नौकरी से हटाया नहीं गया।
बता दें कि विभाग की ओर से 24 दिसंबर 2008 को मैसर्स संधु सिक्योरिटी सर्विसेज को बिजली निगम के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने का ठेका दिया गया था। उस समय पलवल भी फरीदाबाद जिले का हिस्सा था। कंपनी ने पलवल में भी बिजली निगम को कर्मचारी उपलब्ध करवाए थे। उस दौरान एएलएम, एलएम, कंप्यूटर ऑपरेटर, चपरासी सहित अन्य पदों पर कर्मचारी भर्ती किए गए। अब मामले में छह नामजद अधिकारियों सहित अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमे में कहा गया है कि साल 2008 में बिजली विभाग में ठेके पर भर्ती की गई। ठेके पर ऐसे लोगों को नौकरी दी गई, जिनको तकनीकी शिक्षा का ज्ञान नहीं था। इस दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कर्मचारियों को भर्ती कर लिया गया। तत्कालीन बिजली अधिकारियों ने कंपनी के दबाव में बिना दस्तावेजों की जांच करे नौकरी पर कर्मचारी रख लिए। सूचना के अधिकारी के तहत बिजली निगम की तरफ से दी गई जानकारी में बताया गया कि फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज से 60 से ज्यादा कर्मचारी नौकरी कर रहे हैं। निगम की तरफ से उन्हें नौकरी से नहीं निकाला गया है।
सुरक्षा उपकरण के अभाव में कर्मचारी गवां रहे जान
सूचना का अधिकार के तहत जानकारी लेने वाले गांव मीतरोल निवासी अमरचंद ने बताया कि पलवल में गैर मान्यता प्राप्त शैक्षणिक दस्तावेज से 100 के करीब कर्मचारी कार्यरत हैं। विभाग ने मैसर्स संधू सिक्योरिटी सर्विसेज के पास दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को जनशक्ति आपूर्ति करने का लाइसेंस नहीं था। फर्म के पास कम से कम दो वर्षों की अवधि के लिए 25 न्यूनतम कुशल तकनीकी कर्मियों की समान सेवाएं प्रदान करने का भी अनुभव नहीं था। तकनीकी शिक्षा और सुरक्षा उपकरण के अभाव में बिजली निगम के करीब 10 कर्मचारियों की बिजली करंट लगने से मौत हो चुकी है।