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Palwal News: भरत-कैकयी संवाद से दर्शकों की आंखें नम

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पुन्हाना। प्राचीन मथुरा काव्य कला मंडल द्वारा आयोजित रामलीला में रामायण के सबसे मर्मस्पर्शी और भावुक प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। लीला मंचन के दौरान भगवान श्री राम के वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने और महारानी कैकेयी के साथ उनके संवाद के दृश्यों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।
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रामलीला के दृश्य में दिखाया गया कि भगवान राम के वनवास जाने के बाद राजा दशरथ और कैकेयी के बीच गंभीर संवाद हुआ। राजा दशरथ ने अपने अतीत का जिक्र करते हुए श्रवण कुमार की मृत्यु और उनके माता-पिता द्वारा दिए गए शाप की कथा सुनाई। पुत्रवियोग की पीड़ा और व वचनों के बंधनों में घिरे राजा दशरथ ने तड़पते हुए अपने प्राण त्याग दिए। इस दर्दनाक दृश्य को देखकर दर्शक दीर्घा में बैठे लोग भावुक हो गए। इसके उपरांत, लीला में आगे का प्रसंग दर्शाया गया जिसमें राजा दशरथ की मृत्यु से अनजान राजकुमार भरत ननिहाल से अयोध्या लौटते हैं। अयोध्या पहुंचकर उन्हें ज्ञात होता है कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और प्रभु श्रीराम अपने पिता के वचन की रक्षा के लिए माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ वन चले गए हैं। इस गहरे आघात के बाद राजकुमार भरत और महारानी कैकयी के बीच तीखा व मार्मिक संवाद हुआ, जिसमें भरत ने राजपाट और इस विपत्तिपूर्ण स्थिति को लेकर अपनी माता के समक्ष कड़ा रोष व्यक्त किया। काव्य कला मंडल के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इन सजीव और प्रभावशाली अभिनय ने उपस्थित सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरी रामलीला का वातावरण भक्तिमय व गमगीन हो गया।
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