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बीडीपीओ घोटाला : कार्यालय में तैनात स्टेनो व कंप्यूटर ऑपरेटर को किया बर्खास्त

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घोटाले के मास्टरमाइंड आरोपी राकेश के रिश्तेदार की गिरफ्तारी के बाद की गई कार्रवाई
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संवाद न्यूज एजेंसी

होडल। हसनपुर में बीडीपीओ कार्यालय में करोड़ों रुपये के घोटाले में पलवल डीडीपीओ कार्यालय में तैनात कर्मचारी तेजेंद्र की बर्खास्तगी के बाद विभाग ने बीडीपीओ कार्यालय के स्टेनो विवेक व कंप्यूटर ऑपरेटर गौतम को बर्खास्त कर दिया है। दोनों कर्मचारियों की बर्खास्तगी की पुष्टि करते हुए बीडीपीओ प्रवीण कुमार ने कहा कि कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई की सूचना जिला उपायुक्त व पंचायत मुख्यालय चंडीगढ़ के अलावा निदेशक एचकेआरएम को भेज दी है।

दरअसल, जिला उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ व डीडीपीओ उपमा अरोड़ा द्वारा कार्यालय में तैनात कर्मचारी तेजेंद्र की बर्खास्तगी की कार्रवाई करने के बाद सहायक खजाना अधिकारी बिजेंद्र व चपरासी सतपाल व क्लर्क राकेश को सस्पेंड करने की कार्रवाई की गई। वहीं, हसनपुर बीडीपीओ कार्यालय में तैनात स्टेनो विवेक व कंप्यूटर ऑपरेटर गौतम 20 दिसंबर 2024 से बिना विभाग को सूचना दिए ड्यूटी से फरार चल रहे थे। लगातार ड्यूटी पर नहीं आने के बाद डीडीपीओ उपमा अरोड़ा ने हसनपुर बीडीपीओ को कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा। जिस पर कार्रवाई करते हुए बीडीपीओ प्रवीण कुमार ने कर्मचारियों के घर नोटिस भिजवा दिया, लेकिन उनके परिजनों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। बीडीपीओ प्रवीण कुमार ने घोटाले के मास्टरमाइंड आरोपी राकेश के सगे साले स्टेनो विवेक की एंटी करप्शन ब्यूरो की गिरफ्तारी के बाद विवेक व कंप्यूटर ऑपरेटर गौतम को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। बीडीपीओ प्रवीण कुमार ने बताया कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई की सूचना जिला उपायुक्त कार्यालय व डीडीपीओ कार्यालय के अलावा पंचायत मुख्यालय चंडीगढ़ को भेज दी है। वहीं, एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम लगातार घोटाले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह छापा मारकर कार्रवाई कर रही है।
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क्या है मामला

बीडीपीओ कार्यालय में हुए घोटाले की पटकथा गोवा के विभिन्न होटलों में हुई मीटिंग के दौरान लिखी गई। कार्यालय में मास्टरमाइंड क्लर्क राकेश ने अपने साले विवेक व पंचायत मुख्यालय के एसओ, (सीनियर ऑडिटर) शमशेर सिंह व ड्राइवर दीपक ( फर्जी फर्म का संचालक) के साथ गोवा में होटलों में बनी योजना के बाद काम शुरू किया। इसमें आरोपी क्लर्क अनूप को उसकी हसनपुर कार्यालय में ड्यूटी के दौरान शामिल कर सरकारी पैसे को चपत लगाने के लिए डीडीपीओ कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर तेजेंद्र को अपनी टीम में जोड़ लिया। चंडीगढ़ मुख्यालय से शमशेर सिंह हसनपुर बीडीपीओ कार्यालय के नाम पर विकास के लिए बजट भेजता, जिसे डीडीपीओ कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर तेजेंद्र बीडीपीओ कार्यालय में ट्रांसफर कर देता था। इस बजट को क्लर्क राकेश अपने ड्राइवर दीपक के नाम पर बनी फर्जी फर्म के नाम बिल काट देता। बिल पास करने के लिए आरोपी क्लर्क ट्रेजरी कार्यालय होडल में चपरासी सतपाल जो वर्तमान में स्टाफ कम होने की वजह से कंप्यूटर ऑपरेटर का काम कर रहा था, उससे संपर्क कर बिल वहां से पास करवा देता ।
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एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम मास्टरमाइंड से नहीं कर पाई घोटाले के रुपये बरामद



सूत्रों की मानें तो आरोपी क्लर्क राकेश ने करोड़ों रुपये के घोटाले को अंजाम दिया। आरोपी ने घोटाले के रुपयों से जमीन खरीदने के अलावा रुपयों को जरूरतमंद लोगों को ब्याज पर दिया, लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम आरोपी राकेश से रुपयों की वसूली नहीं कर पाई। वहीं, अभी तक एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम घोटाले के सही आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है। सोशल मीडिया पर जारी आंकड़ों में टीम घोटाले को 50 लाख से अधिक राशि का बता रही है। हालांकि, प्रदेश स्तर पर मुख्यालय से सही आंकड़ा मिलने के बाद इस मामले का खुलासा हो पाएगा। एंटी करप्शन टीम के अधिकारी इस मामले में कुछ बोलने से कतराते नजर आ रहे हैं।
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