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Palwal News: विश्व कुष्ठ रोग दिवस पर स्कूलों में चलेगा जागरूकता अभियान

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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी विद्यार्थियों को देंगे जानकारी
दिलाई जाएगी कुष्ठ मुक्त समाज की शपथ


संवाद न्यूज एजेंसी



पलवल। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जांएगे। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को कुष्ठ रोग लक्षण, बचाव और समाज में फैले भेदभाव को खत्म करने की शपथ भी दिलाई जाएगी।
पिछले चार वर्षों में आंकड़ों के अनुसार 2022 में जिले में कुष्ठ रोग के 18, 2023 में 21, 2024 में 15 और 2025 में 14 मरीज सामने आए थे। सभी मरीजों का समय पर इलाज किया गया और वे पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि कुष्ठ रोग से डरे नहीं, बल्कि समय पर जांच और उपचार कराकर इसे जड़ से खत्म करने में सहयोग करें।
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कुष्ठ रोग फैलता है पर छुआछूत से नहीं : डॉ. संजीव
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संजीव ने बताया कि आज भी समाज में कुष्ठ रोग को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं। लोगों को लगता है कि यह रोग एक-दूसरे को छूने से ही फैल जाता है, जबकि यह पूरी तरह गलत धारणा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुष्ठ संक्रामक रोग है पर ये नाक के माध्यम से छींकने और खांसने के दौरान निकलने वाले बैक्टीरिया से फैलता है, न कि सामान्य संपर्क से। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग पूरी तरह से इलाज योग्य है और समय पर उपचार शुरू करने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ भी हो सकता है। शुरुआती उपचार में मरीज को रिफैम्पिसिन नाम की दवा दी जाती है, जिससे रोग का संक्रमण दूसरों में फैलने से रोका जा सके। डॉ. संजीव ने कहा कि डर और झिझक के कारण इलाज में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है।
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मसालेदार खाने के सेवन से करें परहेज

उन्होंने कहा कि कुष्ठ एक चर्म रोग है, जिससे शरीर पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं। ऐसे मरीजों को धूप से बचना चाहिए और प्रभावित स्थान पर नारियल का तेल लगाना चाहिए, ताकि त्वचा रूखी न पड़े और फटने से बचाव हो सके। इसके अलावा गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों, तली-भुनी और अधिक मसालेदार चीजों के सेवन से परहेज करने की सलाह दी गई है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि कुष्ठ रोग दो प्रकार का होता है ग्रेड-1 और ग्रेड-2। ग्रेड-1 में मरीज केवल दवाइयों से ही ठीक हो जाता है। वहीं, ग्रेड-2 की स्थिति में ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है। इलाज की अवधि छह माह से एक वर्ष तक होती है, जिसमें मरीज को नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करना होता है।
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