पलवल। कृषि कानूनों के विरोध मेंशनिवार को होने वाले केएमपी जाम को लेकर रणनीति तैयार होनी शुरू हो गई है। बृहस्पतिवार को धरने के दौरान एक ओर जहां जाम को लेकर चर्चा की गई, वहीं गांवों में जागरूकता अभियान चलाया गया। दूसरी ओर पूरे दिन चौपाई के जरिये किसानों ने कृषि कानूनों पर जमकर कटाक्ष किया।
मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत 25 नवंबर से शुरू हुई थी। पिछले 100 दिनों में सभी महान पुरुषों की जयंती मनाई गई। भारत बंद किया गया और राष्ट्रीय राजमार्ग व रेलवे ट्रैक जाम किया गया। ट्रैक्टर रैलियों के माध्यम से भी सरकार का विरोध जताया व सरकार के साथ 12 राउंड की वार्ता की गई। 100 दिनों के दौरान सर्दी, बरसात और गर्मी में भी आंदोलन जारी रहा। उन्होंने कहा कि देश से बाहर के सामाजिक संगठनों का भी किसान आंदोलन को समर्थन मिला है। धरने की अध्यक्षता हेतलाल तेवतिया व संचालन राजकुमार ओलिहान ने किया। इस मौके पर नवल सिंह, सतपाल नरवत, रामरतन, जगदीश, प्रकाशचंद, फूल सिंह, सोहनपाल चौहान, प्रधान धर्मचंद घुघेरा आदि मौजूद रहे।
चौपालों पर हुआ किसान सभा का आयोजन
बृहस्पतिवार को जागरूकता अभियान के तहत गांवों की चौपालों पर किसान सभा आयोजित की गई। जिसमें किसानों को कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान बताए गए। किसान नेता डॉ. रघुवीर सिंह ने बताया कि नए कृषि कानून किसानों के ही नहीं, बल्कि हर वर्ग के लिए नुकसानदायक हैं। इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर ज्यादा पड़ेगा। इन कानूनों के कारणों किसानों के बच्चों को खाने के लाले पड़ जाएंगे।