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अमर उजाला लाइव: स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी, खाली पड़े हैं गांवों के आइसोलेशन वार्ड

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अनूप पाराशर
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पलवल। प्रदेश सरकार ने गांवों में कोविड मरीजों को आइसोलेट करने के लिए आइसोलेशन वार्ड तो बनवा दिए लेकिन आज तक न तो जिला प्रशासन ने उन आइसोलेशन वार्डों को जाकर देखा है और न ही स्वास्थ्य विभाग ने। हालात यह है कि किसी भी गांव के आइसोलेशन वार्ड में एक भी कोविड मरीज को नहीं रखा गया है। जिसके चलते इन आइसोलेशन वार्डों में ताले लगे हुए हैं। चौकीदार भी ताले लगे आइसोलेशन वार्डों की चौकीदारी कर रहे हैं। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते कोविड मरीज भी अपने आप को इन आइसोलेशन वार्ड में आइसोलेट करने से बच रहे हैं। सरकार द्वारा इन्हें स्थापित करने के लिए खर्च की राशि भी पूरी तरह से बेकार हो गई है।
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सरकार ने पंचायतों को भेजे हैं 30 से 50 हजार रुपये खर्च करने को
सरकार द्वारा इन आइसोलेशन वार्डों को स्थापित करने के लिए खंड विकास एवं पंचायत विभाग को 50 हजार रुपये तक की राशि भी भेजी है। यह राशि गांव की आबादी के हिसाब से भेजी गई है। 10 हजार से कम आबादी वाले गांव में आइसोलेशन वार्ड बनाने के लिए 30 हजार रुपये तथा 10 हजार से अधिक आबादी ले गांवों में आइसोलेशन वार्ड बनाने के लिए 50 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। इस राशि से प्रत्येक गांव में 10-10 बेड वार्ड में डालने थे।
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सुरक्षा के लिए तैनात किए गए ग्राम चौकीदार व सफाईकर्मी
इन आइसोलेशन वार्डों की सुरक्षा के लिए चौकीदार और साफ-सफाई के लिए सफाईकर्मी भी तैनात किए गए थे। लेकिन ताला लगा होने के कारण जहां चौकीदार खाली बैठे हैं, वहीं सफाईकर्मी सफाई नहीं कर पा रहे हैं। हालात ये हैं कि अधिकांश आइसोलेशन वार्डों में लगाए गए बिस्तरों पर धूल जमने लगी है।
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होडल में इन जगहों पर खोले गए आइसोलेशन सेंटर
होडल खंड औरंगाबाद, मित्रोल, सौंध, फुलवाड़ी, बंचारी, तुमसरा, भिडूकी, दीघोट सहित खंड के तीन दर्जन गांवों में ग्रामीण लोगों की सुविधा देने के लिए कोविड आइसोलेशन सेंटर बनाए गए है जंहा पर 24 घटे कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है।ं
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समय: सुबह 9.30
स्थान: गांव बाता: पलवल के गांव बाता में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड का जब सुबह निरीक्षण किया गया तो वहां स्कूल में ताला लगा हुआ था। वार्ड में लगाए गए बेड व चारपाई इधर-उधर यूं ही लगाए हुए थे। वहां आज तक कोई मरीज भर्ती नहीं किया गया।
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समय: सुबह 10 बजे
स्थान: गांव बडौली
गांव बडौली का निरीक्षण करने पर पाया गया कि वहां मात्र 9 बेड लगाए हुए हैं। आज तक इसमें एक भी कोविड मरीज भर्ती नहीं किया गया है। न ही कोई यहां सुविधाएं दीं। गांव के लोगों तक को भी इसके बारे में जानकारी नहीं है।
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समय: सुबह 10.30 बजे
स्थान: चांदहट
गांव चांदहट में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड के गेट पर ताला लगा हुआ था। चौकीदार ने कहा कि इसे आठ दिन पहले बनाया गया था, उसी दिन से ताला लगा हुआ है। आज तक यहां कोई मरीज नहीं है।
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समय: 11 बजे
स्थान अमरौली गांव:
यहां बनाए गए आइसोलेशन वार्ड की हालत देखकर कोई नहीं कह सकता कि यहां मरीज रह सकता है। पूरे स्कूल परिसर में घास उगी हुई है। आज तक एक मरीज यहां नहीं आया। ग्रामीणों को भी नहीं पता इसके बारे में।
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आइसोलेशन वार्ड बनाने के नाम पर 50 हजार रुपये खर्च करने की बात कही गई है, लेकिन यहां देखकर कोई नहीं कह सकता है कि 50 हजार रुपये खर्च हुए हैं। केवल लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
-नन्नू बैसला, बडौली
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सरकार से आइसोलेशन वार्ड बनाने के लिए आई राशि के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। खंड विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा भी राशि नहीं खर्च की गई। गांव में आइसोलेशन वार्ड बनाने में जो खर्च हुआ है, वह मैंने अपने खर्च से बनाया है।
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-सुंदर लाल सरपंच गांव बाता
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गांवों से ही मांगी चारपाई
बीडीपीओ अमित चौधरी ने बताया कि गांवों में खुले आइसोलेशन सेंटरों में संसाधनों के लिए पंचायत को जिम्मेदारी सौंपी गई है। 10 हजार की आबादी से बड़ी पंचायत को 50 हजार व इससे कम आबादी वाली पंचायत को 30 हजार रुपये का कोरोना फंड दिया गया है। इतनी राशि में आइसोलेशन सेंटरों का बेहतर संचालन होना संभव नहीं है और यही कारण है कि गांव के लोगों से ही बेड, चारपाई, चद्दर आदि सामान जुटाया गया है व कोरोना फंड से ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर व अन्य मेडिकल सामान खरीदने के निर्देश हैं।
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