कैश की कमी से जूझ रहे लोगों को नोटबंदी के 23 वें दिन भी कोई राहत नहीं मिली। सेलरी व पेंशन धारक खातों वाले बैंकों में पहले दिन ही समस्या का विकराल रुप देखने को मिला। हालांकि प्रदेश सरकार ने अपने कर्मचारियों को 10-10 हजार रुपये नतदी देने का एलान कर दिया था, लेकिन फिर भी समस्या बढ़ती दिखी।
भयानक कोहरे के व सर्दी के बावजूद भी अधिकांश बैंकों के बाहर सुबह सात बजे से ही लोगों की कतारें लगनी शुरू हो गईं। लेकिन बैंकों का दोपहर से ही पहले ही कैश खत्म हो गया व निराश लोगों को बैरंग लौटना पड़ा।
बृहस्पतिवार की सुबह करीब 10:30 बजे आईडीबीआई बैंक के एटीएम में नकदी डाले जाने की सूचना लोगों को मिली। देखते ही देखते एटीएम बूथ पर कैश निकालने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई व 12:30 बजते-बजते एटीएम ने भी पैसे उगलना बंद कर दिया।
और बढ़ सकती है अधिक परेशानी
बृहस्पतिवार से कर्मचारियों को वेतन मिलना शुरू हो गया। जिले में राष्ट्रीयकृत, सहकारी व निजी क्षेत्र के बैंकों की करीब 135 शाखाएं हैं। हालांकि यहां अधिकांश स्कूल व कंपनियां अपने कर्मचारियों को कैश में वेतन देती रही हैं। क्योंकि अब बैंकों से अधिक मात्रा में पैसे निकालना संभव नहीं है, जिसके चलते बैंकों में अगले कुछ दिनों में अपेक्षाकृत कई गुना भीड़ बढ़ने की संभावना है। हालांकि बैंक प्रबंधक पर्याप्त प्रबंध करने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन चालू हालात में लोगों को परेशानी बढ़ने की संभावना दिख रही है।
सरकारी फैसलों से कहीं खुशी, कहीं आक्रोश
पीएम मोदी के नोटबंदी के फैंसले से तो अधिकांश लोग सहमत दिखते हैं, लेकिन उसके बाद से आ रहे फैसलों को लेकर सांझी प्रतिक्रिया दिख रही है। बीजेपी से जुड़े व बजरंग दल के नेता पूर्व पार्षद मुनीष भारद्वाज पीएम मोदी के बीजेपी सांसदों व विधायकों के आठ नवंबर से 30 दिसंबर के बैंक खातों की डिटेल मांगने का तो स्वागत कर रहे हैं, लेकिन इसे नाकाफी बता रहे हैं। मुनीष का कहना है कि देश के सभी पार्टियों के सांसदों व विधायकों के खातों तथा संपत्ति की दो वर्ष पूर्व की जांच होनी चाहिए।
उनका कहना है कि सांसद व विधायकों के साथ-साथ सरकारी पदों पर आसीन लोगों के खातों का भी खुलासा किया जाना चाहिए। शिक्षाविद आरके शर्मा कहते हैं कि अगर सरकार को आधे-आधे में काले धन का फैसला करना था तो आम आदमी को इतना परेशान क्यों किया गया।