हसनपुर। हसनपुर थाने में कार्यरत दो सहायक उपनिरीक्षकों सहित पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। जबकि एक-दो पुलिस कर्मियों को हसनपुर थाने से दूसरे स्थान पर बदल दिया गया है। यह कार्रवाई पैसे लेकर झूठा मुकदमा दर्ज करने और फर्जी एफआईआर में बनाए गए आरोपी के साथ पुलिस द्वारा मारपीट करने के मामले मेंअतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीकांत जाघव के आदेश पर हुई है। मामले का खुलासा तब हुआ जब मुकदमा दर्ज कराने वाले व्यक्ति ने यह स्वीकार कर लिया कि उसने पुलिसवालों को पैसे देकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हसनपुर थाने में एक व्यक्ति ने किसी के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया गया कि मुकदमा दर्ज कराने वाले ने हसनपुर थाना पुलिस को रुपये देकर केस दर्ज कराया था। इसके बाद थाने में कार्यरत सहायक उपनिरीक्षक अनिल, जीतराम, दो सिपाही व एक हवलदार संजीत ने उस बनाए गए आरोपी के घर जाकर मारपीट की और जबरदस्ती थाने में उठाकर ला उसकी बेइज्जती की गई। सूत्रों के मुताबिक बाद में आरोपी बनाया गया व्यक्ति पुलिस महानिरीक्षक से मिला तथा अपने साथ हुई आपबीती सुनाई। पीड़ित की बात सुनने के बाद पुलिस महानिरीक्षक ने मामले की जांच कराई तो पुलिस कर्मियों को दोषी पाया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने वाले व्यक्ति ने भी पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष यह बात स्वीकार की कि उसने रुपये देकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। इस बात की पुष्टि होने के बाद पुलिस महानिरीक्षक ने पुलिस कप्तान नरेंद्र बिजारनियां को आदेश दिए तथा उक्त पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। इस बारे में जब पुलिस कप्तान से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। हालांकि पुलिस विभाग के पीआरओ मंजीत सिंह इस कार्रवाई की बात स्वीकार की है।