- 15 सितंबर तक पोर्टल पर शिकायत का मौका, जालसाजों द्वारा फसल रजिस्ट्रेशन हड़पने की घटनाओं से किसान दहशत में
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। उपमंडल में किसानों की परेशानी लगातार गहराती जा रही है। एक तरफ भारी बारिश ने उनकी मेहनत को चौपट कर दिया है, तो दूसरी ओर डिजिटल धोखाधड़ी ने उनके भरोसे पर चोट की है। ताजा स्थिति यह है कि हथीन उपमंडल के 86 गांवों के 4,783 किसानों ने अब तक अपनी फसल खराब की शिकायत क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज कराई है। प्रशासन को कुल 31,353 एकड़ फसल के नुकसान की जानकारी मिली है।
नायब तहसीलदार कैलाश चंद्र के मुताबिक किसान 15 सितंबर, सोमवार तक पोर्टल पर शिकायत और दावा दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद सभी शिकायतों का राजस्व विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि निर्धारित समय में अपनी शिकायत अवश्य दर्ज कराएं ताकि मुआवजा प्रक्रिया में कोई दिक्कत न आए।
सबसे अधिक प्रभावित फसलें
कपास, ज्वार, बाजरा और धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। केवल हथीन तहसील के 68 गांवों के 3,256 किसानों ने 22,286 एकड़ भूमि में खराबे की रिपोर्ट दी है। वहीं बहीन उप-तहसील के 18 गांवों के 1,527 किसानों ने 9,067 एकड़ में नुकसान का दावा पोर्टल पर दर्ज कराया है।
पोर्टल पर निगरानी बढ़ाई जाएगी
नायब तहसीलदार ने बताया कि शिकायत दर्ज होने के बाद पटवारी हर खेत तक जाएंगे। कुछ मामलों में एसडीएम और उपायुक्त भी मौके पर जाकर स्थिति की जांच कर सकते हैं। यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पिछले दिनों फसल पंजीकरण से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया था।
हालिया घोटाले ने बढ़ाई चिंता
हथीन-बहीन क्षेत्र से 8,888 किसानों ने शिकायत की थी कि उनकी भूमि पर जालसाजों ने फसल रजिस्ट्रेशन कर लिया। इन मामलों में से 7,947 पंजीकरण रद्द भी किए जा चुके हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते यह गड़बड़ी पकड़ी नहीं जाती तो उन्हें मुआवजे और सरकारी खरीद का लाभ नहीं मिल पाता।
लगातार बढ़ती शिकायतों ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की मंशा डिजिटल सिस्टम के जरिए पारदर्शिता लाने की थी, लेकिन जब यही सिस्टम असुरक्षित साबित हो रहा है तो किसानों का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। अब प्रशासन पर दबाव है कि वह न केवल फसल खराबे का सही मुआवजा सुनिश्चित करे बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे भविष्य में कोई जालसाज किसानों की मेहनत की कमाई पर सेंध न लगा सके। हथीन क्षेत्र के किसानों की यह स्थिति एक गहरी हकीकत बयान करती है—एक तरफ़ प्रकृति की मार और दूसरी ओर सिस्टम की खामियां। दोनों से जूझते किसान अब सरकार से केवल यही उम्मीद कर रहे हैं कि उनका दर्द सुना जाए और उनके अधिकारों की रक्षा हो।
भाजपा मंडल महामंत्री सुधीर कुमार आर्य जैसे कई किसान खुद इस धोखाधड़ी का शिकार हुए और उन्होंने शिकायत दर्ज कराकर अपनी ज़मीन का पंजीकरण दोबारा सही कराया। इन घटनाओं ने किसानों में गहरी बेचैनी पैदा कर दी है।