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यमुना के आसपास के गांवों में बनी पशुओं के चारे की समस्या

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यमुना के आसपास के गांवों में बनी पशुओं के चारे की समस्या
- उत्तर प्रदेश के गांवों से बच्चे जान जोखिम में डाल आ रहे नावों में बैठकर पढ़ने
अमर उजाला ब्यूरो
होडल। यमुना का जल स्तर भले ही घट रहा है, लेकिन खेतों व रास्तों में अभी भी जल स्तर बढ़ने के बाद भरा पानी अभी तक खड़ा है। इस कारण जहां वहां आसपास के गांवों में पशुओं के चारे की किल्लत बन गई है, वहीं उत्तर प्रदेश के गांवों से हसनपुर व आसपास के गांवों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने आने वाले बच्चे पानी भरा होने के कारण प्रशासन द्वारा चलवाई गई नावों में बैठकर पढ़ाई करने आ रहे हैं। ये बच्चे खुद नाव को चलाकर यहां हसनपुर में पढ़ने के लिए आ रहे हैं। वहीं ग्रामीण नावों का सहारा लेकर उत्तर प्रदेश के गांवों में पशुओं के लिए चारे का इंतजाम करने रोजाना जा रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि जलभराव से निपटने तथा पशुओं के चारे के इंतजाम की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही यमुना के कारण जो उनका नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कराई जाए, वरना इस साल उनके व परिवार की भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।

इन गांवों के बच्चे आ रहे नावों से स्कूल
हसनपुर में हरियाणा की सीमा से लगते उत्तर प्रदेश की सीमा में बसे दो गांव किशनगढ़ व भरतगढ़ के बच्चे वहां गांवों में आसपास स्कूल न होने के कारण वर्षों से हसनपुर में स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। ये बच्चे बिल्लोचपुर गांव के स्कूल में पढ़ते हैं। अब जब तक यमुना में उफान था, तब तक बच्चे स्कूल नहीं आ पाए, लेकिन अब जैसे ही यमुना का जल स्तर घटने लगा है, बच्चे खुद यमुना के रास्ते नाविकों के साथ नाव को खुद चलाकर यहां स्कूल में पढ़ाई करने के लिए आ रहे हैं। कभी-कभी बच्चे नाव भी खुद चलाते हैं और एक तरफ का रोजाना 10 -10 रुपये किराया भी देते हैं। छात्र उमेश, मंजू ,रोशनी, सावित्री, प्रभुदयाल आदि स्कूली बच्चों ने कहा कि वह अपनी जान को जोखिम में डालकर और पैसे देकर पढ़ाई करने के लिए यमुना पार आते हैं। यमुना पार करने के लिए उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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फसलें सड़ने के कारण दूसरे गांव से लाना पड़ रहा है चारा
यमुना से लगते उन गांवों में यमुना का पानी आने के बाद खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। कई गांवों में तो खेतों के अंदर इतना पानी भर गया है कि दो माह तक भी उसके निकलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में खेतों में पशुओं के लिए तैयार चारा भी पूरी तरह से खराब हो गया है। फसलों में सड़न होने लगी है। अब ग्रामीणों को दूसरे गांवों में जाकर पैसों से चारा लेकर आना पड़ रहा है। वहीं काफी ग्रामीण अपने पशुओं को रोजाना दूसरे गांवों के जंगलों में चराने के लिए ले जाते हैं तथा शाम को घर वापिस लाते हैं। ऐसे में उन्हें काफी दिक्कत हो रही है। ग्रामीण जसवंत, दिनेश, सबरजीत, मानेंद्र सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि उनके पशुओं के लिए चारे का इंतजाम किया जाए तथा उनकी खराब हुई फसल की भरपाई की जाए।
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यमुना नदी के आस पास धारा 144 लगाई हुई है । साहसी बच्चे जो कार्य कर रहे हैं वो गलत हैं उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए । यमुना नदी के पुल निर्माण की योजना पर कार्य शुरू हैं जल्द काम पूरा होगा । बच्चों को जब तक संभल कर रहना चाहिए, जब तक यमुना में पानी का उफान है।
- डॉ. मनीराम शर्मा, जिला उपायुक्त
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