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गाय की खालों को चोरी से ले जाते पकड़े गए दो लोगों को अदालत ने सुनाई पांच-पांच साल की सजा

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गाय की खालों सहित पकड़े गए दो लोगों को 5-5 साल कैद
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- हरियाणा गो-संवर्धन कानून के तहत अदालत ने सुनाई सजा, 1 अक्टूबर 2018 को गाय की 174 खालों के साथ पकड़े गए थे दोनों दोषी
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। चार माह पहले केएमपी एक्सप्रेसवे पर कोयले की बोरियों के नीचे गाय की खालों को छुपाकर ले जाते हुए पकड़े गए दो लोगों को बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुभव शर्मा की अदालत ने गो-संवर्धन कानून के तहत पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। 2015 में हरियाणा प्रदेश में गो-संवर्धन कानून बनने के बाद पहली बार किसी को अदालत ने सजा सुनाई है। अदालत द्वारा सजा सुनाने के तुरंत बाद पुलिस ने दोनों दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भिजवा दिया।
यह था मामला
कैंप थाना पुलिस ने 1 अक्टूबर 2018 को मुखबिर की सूचना पर केएमपी एक्सप्रेसवे पर टोल बैरियर के पास नाका लगाकर एक पिकअप को रुकवाया। उस गाड़ी में लदी बोरियों में कोयला भरा हुआ था। सूचना के मुताबिक पुलिस ने जब कोयले की बोरियों को निकलवाकर पिकअप की तलाशी ली तो बोरियों के नीचे गायों की 174 खालें बरामद की गईं। पुलिस ने बरामद खालों को तुरंत कब्जे में लेकर गांव रनियाला खुर्द निवासी रियाज और उटावड निवासी हाकम को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हरियाणा सरकार के गो-संवर्धन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर अदालत में पेश किया। जहां से अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया। मामले के जांच अधिकारी हवलदार हरीचंद डागर ने अधिनियम के तहत सारे दस्तावेज के साथ चालान अदालत में पेश कर दिया। उसके बाद अदालत में 4 माह 20 दिन तक इस केस में सुनवाई हुई। आखिरकार न्यायाधीश अनुभव शर्मा की अदालत ने दोनों को गाय की खाल निर्यात करने के लिए ले जाने के मामले में दोषी पाते हुए पांच-पांच साल की सजा सुना दी।
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कानून के तहत पहली बार हुई हरियाणा में सजा
एडीए धर्मपाल ने बताया कि हरियाणा के अंदर गो-संवर्धन एक्ट के तहत पहली बार दो लोगों को सजा सुनाई गई है। न्यायाधीश अनुभव शर्मा की अदालत ने दोषियों को सजा सुनाते हुए कहा कि दोषी किसी भी तरह से क्षमा के काबिल नहीं हैं। दोषियों ने जानबूझ कर निजी लाभ के लिए कानून की अवहेलना कर निरीह और निर्दोष गायों की हत्या की।

क्या है हरियाणा गो-संवर्धन एक्ट
गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए संवैधानिक निर्देश को व्यावहारिक रूप प्रदान करने के लिए मार्च 2015 में हरियाणा विधानसभा द्वारा हरियाणा गोवंश संरक्षण तथा गोसंवर्धन विधेयक 2015 पारित किया गया था। 12 नवंबर 2015 को राष्ट्रपति की सहमति के बाद यह विधेयक तत्काल प्रभाव से कानून के रूप में पारित कर लागू कर दिया गया। इस अधिनियम के द्वारा गोवध को संपूर्ण राज्य में प्रतिबंधित करते हुए इसे दंडनीय अपराध बना दिया गया है। उल्लंघन करने वालों को न्यूनतम 3 वर्ष तथा अधिकतम 10 वर्ष का कठोर दंड दिया जाने का प्रावधान इस कानून में है। साथ ही न्यूनतम 30 हजार से अधिकतम 1 लाख रुपये तक का अर्थदंड भी दोषियों को दिया जा सकता है। आत्म सुरक्षा की दृष्टि से की गई गो हत्या अपराध की श्रेणी में गणना नहीं की जाएगी। कानून के तहत गायों के अवैध व्यापार को प्रतिबंधित कर दिया गया। यदि कोई भी व्यक्ति गायों का निर्यात करना चाहता है तो उसे विशेष अनुमति लेनी पड़ेगी। हत्या के उद्देश्य से गायों का निर्यात करने वाले अपराधी को न्यूनतम 3 वर्ष का तथा अधिकतम 7 वर्ष का दंड दिया जाएगा। साथ ही 30 हजार से 70 हजार रुपये का अर्थदंड का भुगतान करना होगा। संपूर्ण राज्य में गोमांस की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया गया है। गोमांस की अवैध बिक्री करने वाले को न्यूनतम 3 वर्ष तथा अधिकतम 5 वर्ष का दंड दिया जाएगा। साथ ही 30 से 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड भी आरोपित किया जाएगा।
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हरियाणा सरकार द्वारा बनाया गया गो-संर्वधन एक्ट बेहद सख्त बनाया गया है। इस एक्ट के तहत दोषियों को सजा का तो प्रावधान है ही साथ ही इससे गोवंश का संरक्षण हो इसके लिए यह कानून बनाया गया है। हरियाणा की मनोहर सरकार गोवंश के लिए बेहद गंभीर है तथा उसके संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास में जुटी है। गोवंश की हत्या व उसके मांस व खाल का निर्यात करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
- भानीराम मंगला, चेयरमैन, हरियाणा गोसेवा आयोग
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