दूसरे प्रदेशों के अवैध नंबरों की चल रही हैं बसें पर नहीं होती कार्रवाई
- व्यापारियों पर जांच से संतुष्ट होने की बात लिखने का अधिकारी बना रहे दबाव
- व्यापारियों ने सीएम विंडो पर की थी शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। जिले में चल रही हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान नंबरों की अवैध बसों के मामले में व्यापारियों द्वारा की गई शिकायत पर प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय उल्टा व्यापारियों पर ही शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहा है।
आरटीए विभाग के अधिकारियों द्वारा व्यापारियों पर इस बात का दबाव बनाया जा रहा है कि वे सीएम विंडो पर की गई शिकायत को वापस ले लें और शिकायत पर की गई जांच से संतुष्ट हैं, यह लिखकर देने का भी दबाव बना रहे हैं। इस बात से नाराज व्यापारी बृहस्पतिवार को रेलवे रोड मार्केट एसोसिएशन के प्रधान जितेंद्र तेवतिया के नेतृत्व में उपायुक्त डॉ. मनीराम शर्मा व मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी से मिले। व्यापारियों ने इस तरह से दबाव बनाने वाले अधिकारियों की लिखित शिकायत की। व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई न होने पर वे सीएम से भी मिलेंगे।
गौरतलब है कि जिले में उत्तर प्रदेश, हरियाणा व राजस्थान के नंबर की करीब 62 बसें अवैध रूप से चल रही हैं। इन बसों को चलाने के लिए सरकार व परिवहन निगम की तरफ से कोई परमिट भी जारी नहीं किया हुआ है। केवल एक मंत्री के रिश्तेदार का राजनैतिक संरक्षण प्राप्त कर ये बसें चलाई जा रही हैं। इन बसों के चलने से हरियाणा परिवहन निगम को लाखों रुपये महीने का राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। इसके अलावा बस अड्डा चौक पर पूरे दिन जाम लगा रहता है और पुलिस अधिकारी खड़े तमाशा देखते रहते हैं।
10 बसों का चालान का हुई थी खानापूर्ति
इस बात की शिकायत गत दिनों व्यापारियों ने सीएम विंडो पर की थी। इसके बाद सीएम फ्लाइंग व गुप्तचर विभाग के एसपी ने पलवल आकर करीब 10 बसों का चालान कर खानापूर्ति कर डाली। अब आरटीए विभाग के एक अधिकारी व्यापारियों पर जांच से संतुष्ट होने का लिखकर देने का दबाव बना रहे हैं। अधिकारी व्यापारियों से बोल रहे हैं कि जांच पूरी हो चुकी है और लिखकर दें कि वे संतुष्ट हैं।
बस संचालक दे रहे हैं धमकी
व्यापारियों को बस संचालक धमकी दे रहे हैं कि यदि फिर शिकायत की तो अच्छा नहीं होगा और बसें ऐसे ही चलेंगी। इस बात को लेकर व्यापारियों में रोष है। व्यापारियों ने उपायुक्त व सुशासन सहयोगी से मिलकर इस बात की शिकायत की है। जल्द ही सीएम से मिलने का भी निर्णय लिया है। उधर, मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी अभिनव वत्स का कहना है कि वे इस मामले की जांच कराएंगे और सीएम के संज्ञान में मामला लाकर अवैध बसों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।