न सेम की समस्या दूर हुई न पहुंचा रजवाहों में टेल तक पानी: विधायक
-समस्याएं दूर न होने पर होगा सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। हथीन से इनेलो विधायक केहर सिंह रावत ने कहा है कि हथीन में सेम की समस्या, रजवाहों में टेल तक पानी पहुंचाने और बिजली की मांग को लेकर हरियाणा विधानसभा में कई बार मुद्दा उठा चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी सरकार इस तरफ से गंभीर नहीं है। आज भी क्षेत्र में ये समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि अब ये समस्याएं जल्द दूर नहीं हुईं तो वे क्षेत्रों के किसानों को साथ लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। केहर सिंह रावत शुक्रवार को यहां विश्रामगृह में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
विधायक रावत ने कहा कि सिंचाई और बिजली विभाग स्वयं मुख्यमंत्री मनोहरलाल के पास हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने आज तक इन समस्याओं के बारे में जानकारी नहीं ली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को न तो सिंचाई और कृषि के बारे में ज्ञान है और न ही बिजली व्यवस्था के बारे में। यही कारण है कि मुख्यमंत्री के पास दोनों विभाग होने के बाद भी किसान और आम लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। इतना कमजोर मुख्यमंत्री और इतने जिम्मेदार विभागों को अपने पास रखता है तो फिर लोगों की समस्याएं कैसे दूर हो सकती हैं।
रावत ने कहा कि हथीन क्षेत्र में सेम (बंजर भूमि ) की समस्या और सिंचाई के लिए रजवाहों में टेल तक पानी पहुंचाने की मांग को लेकर वे दो बार भूख हड़ताल भी कर चुके हैं। क्षेत्र के किसान भी कई बार आंदोलन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी विपक्ष के विधायक हैं, वहां सरकार भेदभाव बरत रही है। इस बार प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को पूरी तरह से आइना दिखा देगी। रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्वयं विधानसभा में उनके द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने पर आश्वासन दिया था कि जल्द ये समस्याएं दूर हो जाएंगी, लेकिन आज तक किसी ने आकर भी नहीं देखा है। पिछले कितने ही वर्षों से रजवाहों में टेल तक पानी नहीं आया है। रावत ने कहा कि यमुना नदी में भी 30 लाख क्यूसिक पानी प्रतिदिन बह रहा है। उसके बावजूद हथीन क्षेत्र के रजवाहों में पानी नहीं छोड़ा गया है। रजवाहों की सफाई तक नहीं करवाई गई। नहरों के ऊपर चैनलों पर गेट नहीं लगवाए गए हैं। नहरों में पानी छोड़ने तक का कोई शिड्यूल बनाया गया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले समस्याएं दूर नहीं हुईं तो पहले विधानसभा में सरकार को घेरा जाएगा, उसके बाद जिले के अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।