राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ में एक निजी ग्रेनाइट कंपनी को पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने पर तीन करोड़ रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। एनजीटी चेयरपर्सन न्यायमूर्ति एके गोयल की पीठ ने कहा कि कंपनी ने एक आवेदन दायर किया था जिसमें कहा गया था कि उसने पर्यावरण मानदंडों का अनुपालन किया है, लेकिन संलग्न दस्तावेजों में यह नहीं दिखाया गया है कि वास्तव में ऐसा हुआ था।
विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद के साथ न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी की पीठ ने कहा कि परियोजना प्रस्तावक (पीपी) या कंपनी के पक्ष में लीज अक्तूबर 2017 में शुरू हुई और पर्यावरण मंजूरी (ईसी) सितंबर 2019 में दी गई थी। लेकिन 2019 से 2022 तक अनुपालन दिखाने के लिए कुछ भी नहीं था। हरित पैनल ने कहा कि यह राशि एक महीने के भीतर जिलाधिकारी के पास जमा करनी होगी।