साल समाप्त होने को है पर नगर शहर की सरकार विवादों में ही घिर हरी। जिसकी वजह से विकास नहीं हो पाया। हालांकि आखरी माह में जब नगर परिषद को शहर के विकास की आयद आई तो 400 मीटर लंबी सड़क का निर्माण जरूर हुआ पर अन्य प्रोजेक्ट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं आया।
नगर पालिका का विवाद -2019 में सुर्खियों में रहा। इस दौरान नगर पालिका चेयरपर्सन की कुर्सी पर बैठने के लिए खेल चलता रहा। मौजूद चेयरपर्सन को निलंबित किया गया। उपप्रधान को कुछ दिन के लिए चेयरमैन की कुर्सी भी मिली। इसके बद चेयरपर्सन अदालत के सहारे दोबारा से अपनी कुर्सी पर विराजमान हो गई। जनवरी 2019 में नगर पालिका में विकास का कोई प्रोजेक्ट नहीं लाया गया। फरवरी माह में नगर पालिका की बैठक हुई।जिसमें नगर पालिका के केवल चार पार्षद ही शामिल हुए। नगर पालिका की बजट बैठक भी बुुलाई गई। बजट बैठक अब तक पारित नहीं हो सकी है। साधारण बैठक को भी चुनौती दी गई है।
जनवरी 2019 में कुछ पार्षदों ने नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग तथा उनके पार्षद पति सुरेंद्र बंटी के खिलाफ डीसी को शिकायत दी। जिसमें तात्कालिक डीसी ने एडीसी के जरिए जांच कराई। जांच रिपोर्ट को शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक को भेज दिया। 27 फरवरी 2019 को नपा चेयरपर्सन रीना गर्ग तथा उनके पार्षद पति को निलंबित कर दिया गया। एक मार्च को रीना गर्ग ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी। अदालत ने रीना गर्ग के निलंबन पर स्टे आर्डर दे दिया। इसके बाद 12 जुलाई को स्टे खारिज हो गया। जिस पर उपप्रधान रमेश बोहरा को दोबारा से चेयरमैन की पावर मिली। रीना गर्ग ने स्टे खारिज होने के बाद इसे डबल बेंच में चुनौती दी। 9 अगस्त को उच्च न्यायालय की डबल बेंच का दरवाजा खटखटाया। जहां से 28 अगस्त को रीना गर्ग को दोबारा से राहत प्रदान करते हुए निलंबन को खारिज कर दिया। नगर पालिका के सदस्यों का अधिकतर समय अदालत में ही बीता।
पार्षदों की सदस्यता का मामला भी हाईकोर्ट तक पहुंचा
रीना गर्ग ने अगस्त में नपा की लगातार चार मीटिंग में पार्षदों के शामिल नहीं होने का हवाला देकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में नपा के उप प्रधान रमेश बोहरा, पार्षद डॉ. तरुण, कृष्ण शर्मा, देवेंद्र सैनी, बबीता सैनी, विष्णु वाल्मीकि की सदस्यता रद्द करने की मांग थी। चेयरपर्सन ने अपनी याचिका में बताया कि 13 जुलाई 2017, 16 फरवरी 2018, 4 जनवरी 2019, 9 जनवरी 2019 की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। लगातार चार बैठकों में नहीं आने के कारण पार्षदों की सदस्यता को रद्द किया जाए। उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर को इस याचिका को कोर्ट में निपटान कर मामला संबंधित अधिकारी को भेज दिया। पार्षदों के निलंबन, सदस्यता रद्द करने के बारे में शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक के पास शक्तियां हैं। निदेशक ने इस मामले में उपायुक्त से जांच रिपोर्ट मांगी है। डीसी ने इस मामले में 25 नवंबर , दो दिसंबर को सुनवाई थी। अब 23 दिसंबर को अगली बैठक होनी है।
नरेंद्र खन्ना का मामला निदेशक को भेजा......
पार्षद नरेंद्र खन्ना के खिलाफ धीरज ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। एक्ट सेक्शन-14ए के मुताबिक किसी पार्षद के खिलाफ कोई जांच लंबित है तो उसको अयोग्य करार दिया जा सकता है। नरेंद्र खन्ना के खिलाफ दो फौजदारी मामले चल रहे हैं। इसमें डीसी ने उनके मामले को निदेशक के पास भेजा हुआ है।
तीन पार्षदों की सदस्यता का केस भी कोर्ट में
नगर पालिका के तीन पार्षदों अमित मिश्रा, नरेंद्र खन्ना, कमलेश तायल की सदस्यता का एक केस भी पिछले तीन साल से अदालत में चल रहा है। इन पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया था।इनका इस्तीफा नामंजूूर कर दिया गया था। इसी बीच अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया। इन पार्षदों की सदस्यता का एक अलग केस हाईकोर्ट की डबल बैंच में चल रहा है।
350 मीटर की सड़क पूरे साल की उपलब्धि
इस साल विकास कार्यों के नाम पर केवल 350 मीटर की सड़क का निर्माण हुुआ। सड़कों के लिए एक करोड़ के टेंडर पास भी हुए। इसके बाद भी काम शुरू नहीं हो सका। पूरे साल नगरवासी गड्ढों वाली सड़कों पर हिचकोले खाते हुए जनप्रतिनिधियों को कोसते रहे। लोगों को उम्मीद थी कि रामबिलास शर्मा के मंत्री पद से हट जाने के बाद अब विकास कार्य तेजी से होंगे। ऐसा कुछ नहीं हो सका।