फोटो संख्या:67- आर्य समाज महेंद्रगढ़ में हवन करते समाज के लोग--स्रोत- आयोजक
महेंद्रगढ़। आर्य समाज मुख्यालय में रविवार को यज्ञ का आयोजन किया गया। वेद प्रचार मंडल के प्रधान डाॅ. प्रेम राज आर्य व आर्य समाज के प्रधान भूपेंद्र सिंह आर्य ने बताया की त्रिगुणात्मक प्रकृति का स्वभाव यज्ञ परंपरा के अनुरूप है
समुद्र बादलों को उदारतापूर्वक जल देता है, बादल एक स्थान से दूसरे स्थान तक उसे ढोकर ले जाने और बरसाने का श्रम वहन करते हैं। नदी प्रवाहित होकर भूमि को सींचते और प्राणियों की प्यास बुझाते हैं। वृक्ष एवं वनस्पतियां अपने अस्तित्व का लाभ दूसरों को ही देते हैं। उन्होंने बताया कि यज्ञ ही इस संसार चक्र का धुरा है। धुरा टूट जाने पर गाड़ी का आगे बढ़ सकना कठिन है। इसलिए ऋषियों ने यज्ञ को संसार की नाभि बताया है। ऋषियों के निर्देश अनुसार हमें नित प्रति यज्ञ करना व कराना परम आवश्यक है। इस अवसर पर बहन केसर आर्या, वीर सिंह मेघनवास, बाबू रंगराव सिंह आर्य, डॉ. आनंद कुमार, महेंद्र दीवान, सूबेदार मेजर सूबे सिंह, दीपक आर्य ने यज्ञ में आहुति दी।