हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ हुई दरिंदगी की वारदात से महिलाओं का गुस्सा आक्रोश बनकर फूट रहा है। महिलाओं का कहना है कि हमें आरक्षण नहीं, सुरक्षा और सरंक्षण चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए अच्छे कानून बनाने होंगे। पुलिस को सही से ड्यूटी निभानी होगी। युवाओं को अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा, दरिंदगी करने वालों को ऑन द स्पॉट सजा देनी होगी। अपराधियों के दिल में खौफ होगा, जब उनको कड़ी और त्वरित सजा का प्रावधान होगा। अगर देश में सरकार सख्त नियम तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने में नाकाम रही तो आए दिन इसी प्रकार केस होते रहेंगे।
वीरवार को अमर उजाला की ओर से सूरज स्कूल में महिला उत्पीड़न विषय पर संवाद सेतु कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला शिक्षकों ने हैदराबाद की वारदात को इस साल की सबसे घृणित घटना बताया। महिला शिक्षकों ने कहा कि कोर्ट में तारीख पर तारीख मिलती रहती हैं। निर्भया कांड को सात वर्ष बीत चुके हैं, परंतु अभी तक आरोपियों को सजा नहीं मिल पाई है। पीड़िता का परिवार कोर्ट में चक्कर लगाकर परेशान होता रहता है। महिला अपराध के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बने, ताकि एक या दो महीनों में इन दरिंदों को फांसी की सजा सुनाई जाए सके। ऐसे दरिंदों को उम्र कैद नहीं, बल्कि चौराहे पर फांसी पर लटकाना चाहिए। इससे ऐसा करने वालों रूह कांप उठेगी और भविष्य में कोई ऐसी वारदात को अंजाम देने से घबराएगा।
-देश में बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। हम अपने बेटियों को बाहर पढ़ाने के लिए भेजते हैं तो हमेशा मन में डर बना रहता है। अब कैंडल मार्च निकालने और शोर- शराबा करने से कुछ नहीं होगा। दुष्कर्मियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना होगा। मुख्य चौराहों पर पुलिस सुरक्षा बढ़ानी होगी। रात को जगह-जगह पीसीआर तैनात करनी होगी।
-सुगीता।
-हैदराबाद कांड ने देश को शर्मसार कर दिया है। देश में महिला उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए देश में सख्त कानून बनाने होंगे। अपराधियों को कड़ा दंड देना होगा। दुष्कर्मियों को उम्र कैद की सजा नहीं, बल्कि बीच चौराहे पर फांसी पर लटकाना चाहिए। रात को पुलिस गश्त भी बढ़ानी होगी।
-वीना।
-निश्चित रूप से सामाजिक मूल्यों में गिरावट आई है। इसी कारण आए दिन दुष्कर्म की वारदात सामने आ रही हैं। हमें भी सामाजिक मूल्यों को सुधारना होगा। माता-पिता को अपने बेटों को अच्छे संस्कार देने होंगे। हमेें उनकी सोच बदलनी होगी। हमें बच्चों से इस प्रकार की घटना के बारे में छिपाते हैं, लेकिन हमें ऐसी घटना को छिपाने की बजाय उनको इसके दुष्परिणाम बताने होंगे।
- कविता सोनी।
-इसमें कोई शक नहीं कि देश की कानून व्यवस्था बिगड़ी हुई है। हैदराबाद की वारदात ने साबित कर दिया है कि देर रात नहीं अब आठ बजे भी महिलाओं का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। निर्भया कांड के आरोपियों को आज तक सजा नहीं मिल पाई है। इसी प्रकार अब यह पांच-छह वर्षों तक चलता रहेगा। तारीख पर तारीख लगती रहेंगी। ऐसा कब तक चलेगा।
-शोभा।
-हमें देश में 33 प्रतिशत आरक्षण की बजाय सुरक्षा की जरूरत है। आए दिन महिला उत्पीड़न मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को सुरक्षा अधिक जरूरत है, आरक्षण की नहीं। जब महिला सांसद संसद में महिला सुरक्षा का मामला नहीं उठा सकती तो उनकी संसद में भागीदारी क्यों? जब वो महिलाओं की आवाज नहीं बन सकती तो ऐसी महिला सांसदों का संसद में बैठने का कोई अधिकार नहीं है।
-उषा।
-हैदराबाद की वारदात ने देश में बेटियों के प्रति डर का माहौल पैदा कर दिया है। महिलाएं अपने आप को असुरक्षित महसूस करने लगी हैं। मां-बाप बेटियों को पैदा करने से इसलिए नहीं डरते कि उनको शादी में दान दहेज देना पड़ेगा। वो इसलिए डरते हैं कि उनकी बेटी के साथ कोई ऐसी शर्मसार कर देने वाली घटना न हो जाए। ऐसी वारदात जिसकी माता-पिता की बेटी के साथ हो जाती है, वो शर्म से जीते जी मर जाता है।
-दिव्या।
-महिला सुरक्षा के लिए सरकार दावे कर रही है कि महिलाओं को मार्शल आर्ट सिखाया जा रहा है। सरकार 15 वर्ष की उम्र की किशोरी को मार्शल आर्ट सिखा सकती है, लेकिन पांच से दस वर्ष की आयु को मार्शल आर्ट नहीं सिखाया जा सकता। ऐसी दरिंदगी तो पांच से दस वर्ष की बच्चियों के साथ भी हो रही है। इसके देश में सख्त कानून बनाने होंगे। ऐसा करने से ही हालात बदलेंगे।
- शर्मिला।
-दुष्कर्म की वारदातों पर रोक लगाने के लिए सामाजिक मूल्यों में बदलाव के साथ कानून में भी बदलाव लाना होगा। युवाओं की सोच बदलनी होगी। पुलिस को अपनी ड्यूटी पूरी तरह से निभानी होगी। सरकार ने पुलिस हेल्प लाइन नंबर जारी किए हुए हैं, परंतु उनकी प्रॉसेस इतनी धीरे होती है जब तक पुलिस आती है तब तक बदमाश वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। पुलिस सही से काम करे।
-रेणु।
-हमें अपने बेटों को भी संस्कार देने की जरूरत है। हम बेटियों को समझाएं कि घर की इज्जत उनके हाथ है। उसी तरह से बेटे को समझाएं कि दूसरे के घर की इज्जत उसके हाथ है। किसी के घर की इज्जत खराब मत करना। दूसरे की बहन- बेटियों को भी अपनी बहन की तरह से सम्मान देना। ऐसा करने से बहनों को सुरक्षित किया जा सकेगा। ऐसा नहीं किया तो हम अच्छा समाज नहीं बना सकते।
-गुरप्रीत।
-ऐसे घिनौने अपराध करने वाले के साथ किसी तरह की दया नहीं होनी चाहिए। अदालत इस तरह के दोषियों को एक साल में फांसी पर लटकाए। दोषी को फांसी होने तक रोजाना दर्दनाक सजा मिले। जिससे उसे मौत से पहले गुनाहों का सबक मिल सके। उसे पता हो कि उसने कितना बड़ा अपराध किया। इस तरह के केस के लिए अलग अदालत होनी चाहिए। ऐसे लोगों को अदालत की ओर से फांसी होने के बाद दया की अपील करने का कोई मौका नहीं होना चाहिए।
रेणु भारद्वाज।