नारनौल। ओल्ड स्टेट हाईवे 148बी (नारनौल से आकोदा वाया महेंद्रगढ़) का निर्माण कार्य शुरू होने में अभी समय और लगेगा। क्योंकि अभी सरकार से तकनीकी मंजूरी नहीं मिली है। डेढ़ महीने से एमडी का पद खाली है और किसी अन्य अधिकारी को चार्ज दिया गया है। इस वजह से फाइल चंडीगढ़ में लंबित पड़ी है। पिछले 9 महीने से रोड की टेंडर प्रक्रिया चल रही है। सरकार इस प्रोजेक्ट को गंभीरता से नहीं ले रही जबकि जिले की जनता रोड की वजह से बेहद परेशान है। दस वर्ष कांग्रेस तथा साढ़े सात वर्ष भाजपा सरकार को हो गए लेकिन अभी तक यह रोड नहीं बन पाई है।
नारनौल-महेंद्रगढ़-चरखी दादरी रोड को अंतिम बार 2002-03 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला ने ही बनवाया था। इसके बाद दस वर्ष कांग्रेस तथा साढ़े सात वर्षों से सूबे में भाजपा का राज है। अभी तक यह रोड बन नहीं पाई है। हरियाणा स्टेट रोड एंड ब्रिज डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एचएसआरडीसी) ने 6 जून को तकनीकी रूप से टेंडर खोले थे जिसमें दो एजेंसियां आई थीं। इसके बाद विभाग ने मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को भेज दिया था। पिछले डेढ़ महीने से उपरोक्त विभाग के एमडी नहीं हैं और न ही सरकार किसी अन्य अधिकारी को इनका चार्ज सौंप रही है। इस वजह से अभी तक टेंडर की मंजूरी नहीं आई है। मंजूरी के बाद ही वित्तीय बीड खुलेगी और टेंडर अलॉट होंगे। इसके बाद ठेकेदार को एक महीने के अंदर काम शुरू करना होगा।
नारनौल-महेंद्रगढ़ स्टेट हाईवे जर्जर हो गई है। कई स्थानों पर गड्ढे बनने से वाहन चालकों को दिक्कत होती है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नांगल सिरोही के पास तो सड़क काफी खराब है। वहां 15 से 20 फुट की परिधि में गड्ढे बन गए हैं। स्थिति यह है कि नारनौल से महेंद्रगढ़ की 25 किलोमीटर दूरी तय करने में एक घंटे का समय लग जाता है।
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दो वर्ष पहले हुआ था रोड डिनोटिफाई
बता दें कि एनएएचआई ने जून 2020 में नारनौल से चरखी दादरी रोड को डिनोटिफाई कर दिया था। डिनोटिफाई होने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा रोड बनाया जाना था। इस रोड का नाम ओल्ड स्टेट हाईवे 148बी दिया गया। सरकार ने इस रोड को बनाने के लिए एजेंसी तलाश करने में एक वर्ष से अधिक समय लगा दिया। एक वर्ष बाद 2021 में एचएसआरडीसी को रोड बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी किए। सरकार की ओर से 298 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी।
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नौ माह बीत गए, टेंडर प्रक्रिया नहीं निकल पाए बाहर
रोड के निर्माण के लिए एचएसआरडीसी ने 16 नवंबर 2021 को पहली बार टेंडर लगाया था जो 4 जनवरी को खोला गया था। मात्र एक कंपनी ने टेंडर लगाया था जिससे उसी दिन टेंडर रिकॉल कर दिया गया। 28 जनवरी 2022 को दूसरी बार टेंडर खोला गया। इसके बाद फरवरी अंत तक तकनीकी मंजूरी भी आ गई थी और वित्तीय बीड भी खुल चुकी थी। टेंडर अलॉट होना बाकी था। सरकार पहले इसे हैम योजना के तहत बनवा रही थी। इसका रेट ज्यादा होने की वजह से टेंडर रद्द कर दिया गया था। बाद में एक बार फिर टेंडर लगाया गया जो 06 जून को तकनीकी रूप से खोला गया था और सरकार को मंजूरी के लिए पत्र भेजा गया था।
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स्टेट हाईवे से जुड़ते हैं 16 जिले
स्टेट हाईवे से प्रदेश के 16 जिले जुड़ते हैं। इससे जुड़े जिलों में दादरी, भिवानी, रोहतक, झज्जर, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत व कैथल शामिल है। इसके अलावा राजस्थान के कोठपुतली से पंजाब, चंडीगढ़ व हिमाचल को भी यही हाईवे जोड़ता है।
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वर्जन:
डेढ़ महीने पहले हमने सरकार को मंजूरी के लिए फाइल भेजी थी लेकिन एमडी का पद खाली होने से मंजूरी नहीं मिल पाई है। न ही अभी किसी अन्य अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। जैसे ही मंजूरी मिलेगी, आगे की कार्रवाई शुरू कर देंगे।- सोमबीर दहिया, एक्सईएन, एचएसआरडीसी।
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वर्जन:
जल्द ही सरकार किसी एमडी को नियुक्त कर देगी। उक्त प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाकर जल्द ही काम शुरू करवा देंगे। इस प्रोजेक्ट पर सरकार बहुत गंभीरता से काम कर रही है।- दुष्यंत चौटाला, उप मुख्यमंत्री