फोटो नंबर- 13मोडा वाल प्राचीन शिव मंदिर।
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नारनौल। रेवाड़ी रोड पर बस स्टैंड के पास स्थित प्राचीन मोड़ावाला मंदिर के प्रति लोगों की भारी आस्था है। इस मंदिर में सुबह शाम सैकड़ों लोग भगवान शिव की पूजा करने के आते करने आते हैं। मोड़ावाला मंदिर का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। मंदिर के इतिहास को लेकर जानकारों द्वारा बताया जाता है कि जहां आज मंदिर बना है, वहां सैकडों वर्ष पहले श्मशान घाट हुआ करता था। इसी स्थान पर एक मोड़ा संत पूजा किया करते थे।
बताया जाता है कि एक उनके द्वारा खुदाई करते समय जमीन से यह शिवलिंग मिला, जो जमीन के बहुत अंदर तक था। मोड़ा संत ने वहीं शिव की तपस्या शुरू कर दी, जिससे उस समय कई चमत्कार हुए। इसके बाद लोगों द्वारा यहां मोड़ावाला मंदिर बनाया गया और श्मशान घाट को आगे स्थापित किया गया। तभी से लोगों की इस मंदिर के प्रति भारी आस्था जुड़ी हुई हैं।
मंदिर की खासियत
आज मोड़ावाला मंदिर ने भव्य रूप धारण कर लिया है। मंदिर में सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मंदिर के बाहर मैदान में विशालकाय भगवान शंकर की प्रतिमा भी बनाई गई है। इसके अलावा मंदिर की देखरेख के लिए एक कमेटी भी बनाई गई है।
पूजन विधि
26 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। शिवरात्रि का भारतीय सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व है। इस दिन भगवान का रुद्राभिषेक करना अति लाभदायक होता है। आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने बताया कि अलग-अलग कामनाओं को लेकर अलग-अलग द्रव्य से रुद्राभिषेक करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। उदाहरण स्वरूप संतान प्राप्ति के लिए दूध, लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने का रस, आरोग्यता प्राप्त करने के लिए सर्वौषधि युक्त जल से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना चाहिए।
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मोड़ावाला मंदिर के प्रति लोगों की बड़ी आस्था है। महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर में भगवान शिव का विशेष शृंगार किया जाएगा। शाम को भव्य आरती में के समय श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहेगी।
-राजेंद्र पुजारी, मोड़ावाला मंदिर।