शहर में वैसे तो कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं, लेकिन जल महल की उनमें एक अलग पहचान है। जल महल प्रदेश के ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है। मगर पिछले तालाब में कुछ वर्षों से पानी नहीं होने के कारण इस ऐतिहासिक स्मारक की शोभा फीकी नजर आने लगी है। सरकार व प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिस कारण ऐतिहासिक स्मारक अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। सरकार की तरफ से जल महल को ऐतिहासिक स्थल बनाने का प्रयास किया जा रहा है, मगर जिस नाम से जल महल की पहचान होती है अर्थात महल में जल की व्यवस्था करवाने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बता दें कि शहर में बने जल महल जिले ही नहीं प्रदेश में अलग पहचान है। इसी के चलते इसे प्रदेश के ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल किया गया है। जल महल को देखने के लिए न केवल बाहर से लोग आते हैं, बल्कि विदेशी पर्यटक भी इसका दीदार किए बिना वापस नहीं जाते हैं। कुछ वर्ष पूर्व जल महल में पानी डलवाने के लिए विशेष पाइप लाइन डाली गई थी। जिसके बाद नहरों में पानी आने पर जल महल भी पानी से भर जाता था, लेकिन कुछ समय बाद जल महल की एक दीवार टूट गई। जिसे अभी तक ठीक नहीं किया गया है। इससे इसमें पानी नहीं जा रहा है। ऐसे में बिना जल के महल अपनी पहचान खोता जा रहा है।
जल महल बन सकता है पर्यटन स्थल
अगर सरकार इसमें सभी प्रकार सुविधाएं व इसकी देखरेख, रखरखाव आदि की व्यवस्था करे तो यह एक पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है। हालांकि अभी भी दूर-दूर से लोग इसे देखने के लिए आते हैं। यहीं शहर के कुछ रिसोर्ट में रुकने वाले विदेशी पर्यटक भी यहां आते हैं। ऐसे में अगर सरकार इसे पर्यटन स्थल के रूप में उभारते हुए इसमें सभी प्रकार सुविधा उपलब्ध करवाकर टिकट चालू कर दे तो इससे सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति होगी। वहीं इस राजस्व से इसकी देखभाल व रखरखाव करने में सहायता मिलेगी।
जलमहल के जीर्णोद्धार के लिए पुरातत्व विभाग नहीं है गंभीर
सरकार इन राष्ट्रीय धरोहर का जीर्णोद्धार कर अपनी आमदनी बढ़ा सकती है। लेकिन अधिकारी व सरकार इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जल महल में पानी भरने के लिए नहर से पाइप लाइन डालने के बाद भी जल महल में पानी नहीं हैं। विभाग की तरफ जलमहल की सुरक्षा के लिए करीब दस से ज्यादा कर्मचारी तैनात किए हैं। मगर करीब दो साल पहले शुरू हुआ सुलभ शौचालय व लाइब्रेरी का निर्माण कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुरातत्व विभाग ऐतिहासिक स्मारक जल महल की देखरेख के लिए कितना गंभीर है।
शहर में बीरबल का छत्ता, चोर गुंबद, तख्त वाली बावड़ी, ईदगाह व शाह कुली का मकबरा जैसी कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं। जिससे नारनौल शहर की पहचान राष्ट्रीय व अतरराष्ट्रीय स्तर पर होती है, लेकिन सरकार की ढीली कार्यशैली व प्रशासन की लचर कार्य व्यवस्था के चलते राष्ट्रीय धरोहर खंडहर में तब्दील होती जा रही है। सरकार इनका जीर्णोद्धार कर अपनी आमदनी बढ़ा सकती है।
जल महल की दीवार टूटी होने के कारण काफी समय से पानी नहीं डाला जा रहा है। टूटी दीवार बनाने के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। जल्द ही दीवार को ठीक करवाकर जल महल में पानी डाला जाएगा। -ओमप्रकाश यादव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री हरियाणा सरकार।