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.....भाई फागण जिसी धूप पड़ै सै, फसल कित तै हौवैगी

Mon, 04 Jan 2016 11:12 PM IST
महेंद्रगढ़ / नारनौल
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अभी जनवरी माह की शुरूआत ही हुई है, मगर धूप ऐसी पड़ रही है कि फरवरी माह  समाप्त होने वाला हो। इस बदलते मौसम के कारण लोगों का हाल बेहाल है। वहीं किसानों को अपनी फसलों की चिंता सताने लगी है। दिन के समय इतनी तेज धूप पड़ रही है कि दो मिनट भी धूप में खड़ा नहीं रहा जा सकता। किसानों का कहना है कि यदि मौसम का यही हाल रहा तथा उनकी पूरे साल की मेहनत खराब हो जाएगी।
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रात को ठंड और दिन में तेज धूप ने किसानों की नींद उड़ा दी है। जनवरी माह में फरवरी माह के अंत जैसा वातावरण बनने से किसानों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। दो-तीन दिन से अधिकतम तापमान 20 डिग्री से ऊपर चल रहा है, जो इन दिनों होने वाले तापमान से चार से पांच डिग्री अधिक है। ऐसे में रबी की फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। कृषि विशेषज्ञ भी इस नुकसान से चिंतित हैं। इस कारण फसलों के उत्पादन में गिरावट आ सकती है तथा खराब फसल का परिणाम केवल किसान ही नहीं, अपितु आमजन को भी भुगतना पड़ सकता है।

नहीं हैं सिंचाई के पर्याप्त संसाधन
जिला महेंद्रगढ़ कृषि प्रधान जिला है। इस जिले में रबी फसल के दौरान सरसों, गेहूं, जौ एवं चना की फसलें प्रमुखता से बोई जाती है। कृषि योग्य उपजाऊ जमीन होने के बावजूद सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण किसानों को अक्सर बरसात पर ही निर्भर रहना पड़ता है। मगर बरसात में साल-दर-साल गिरावट आती जा रही है और कृषि योग्य उपजाऊ जमीन का रकबा घटता जा रहा है। अबकी बार रबी फसल के दौरान किसानों को बरसात की कमी बेहद खली है। इलाके में पिछले करीब चार महीनों से कोई बरसात नहीं हुई है। इसी का परिणाम रहा कि सिंचाई के अभाव में अंतिम दिनों में खरीफ फसल पूरी तरह पक नहीं पाई थी और किसानों को भारी नुकसान हुआ था।
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प्रमुख फसल मानी जाती है रबी की फसल
खरीफ फसल के नुकसान को भूलकर किसान खेती व्यवसाय में कमाई का प्रमुख साधन मानी  जाने वाली रबी फसल की बिजाई में जुट गए थे। किसानों ने बिजाई से पहले बरसात की खूब उम्मीद लगाई, लेकिन वह पूरी न हो सकी। जैसे-तैसे करके किसानों ने रबी फसल की बिजाई तो कर दी, लेकिन अब बरसात ने उन्हें फिर से रुला दिया। सर्दी का मौसम होने के बावजूद इलाके में दिन के समय गर्मी तो नहीं, लेकिन माहौल वैसा ही बना रहता है।

दिन का तापमान चल रहा करीब 20 डिग्री
पिछले करीब पांच-सात दिनों से यह मौसम बना हुआ है। दिन का तापमान इन दिनों इलाके में 20 डिग्री के आसपास बना रहता है। दिन के समय सूर्यदेव पूरे यौवन पर होते हैं। इससे हालांकि लोगों को राहत मिल रही है, लेकिन फसलों का नुकसान हो रहा है। जनवरी माह में अकसर धुंध गिरने से नमी का वातावरण बना रहता है और इसका सीधा लाभ सरसों एवं गेहूं जैसी प्रमुख फसल को मिलता है लेकिन अबकी बार किसान बरसात को दूर धुंध को भी तरस रहे हैं। अगर ऐसा ही मौसम अगले दस-पंद्रह दिनों तक बना रहा तो यहां की फसलें सूख जाएंगी और किसान बर्बाद हो जाएंगे।

खराब मौसम से घट रही बिजाई
जिला महेंद्रगढ़ को कृषि उपजाऊ क्षेत्र माना जाता है। इस जिले में करीब एक लाख 70 हजार हेक्टेयर को कृषि विभाग द्वारा उपजाऊ माना जाता है, लेकिन बार-बार बरसात में गिरावट आने  से यह रकबा घट रहा है। अबकी बार सर्दी की शुरूआत में बरसात नहीं होने से यह रकबा और ज्यादा घट गया। अबकी बार किसानों ने करीब 77 हजार 310 हेक्टेयर में ही सरसों की बिजाई की है, जबकि अकसर यह 95 हजार से एक लाख हेक्टेयर होती है। इसी प्रकार गेहूं महज 43,655 हेक्टेयर में बोया गया है, जबकि यह लगभग 65 हजार होता है। चना एवं जौ की बिजाई करीब पांच हजार हेक्टेयर में की जाती है, लेकिन अबकी बार चना 3,865 व जौ 1,730 हेक्टेयर में बिजाई की गई है।
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