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मुसलाधार बारिश से सड़कों और मुहल्लों में भरा पानी

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सुभाष पार्क के साथ सड़क पर भरा बारिश का पानी। संवाद - फोटो : Narnol
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नारनौल। क्षेत्र में सुबह दस बजे से लगातार हो रही बारिश ने 27 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शुक्रवार को 190.2 एमएम बारिश दर्ज की गई। राजकीय महाविद्यालय के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन ने इससे पहले सितंबर 1995 में इतनी बारिश दर्ज की गई थी। बारिश से सड़कों और मुहल्लों में पानी भर गया जिससे आवागमन प्रभावित रहा।
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लगातार हुई बारिश ने नगर परिषद के नालों की सफाई व्यवस्था की पोल खोल दी है। मानसून से पहले नगर परिषद ने लगभग दस लाख रुपये से नालों की सफाई कराने का दावा किया था। नालों की ठीक से सफाई नहीं होने की वजह से बारिश से गली मोहल्लों में पानी भर गया। सड़कों पर जलभराव हो गया। दुकानों और घरों में पानी घुसने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। राव का मोहल्ला, सलाम पुरा, पीर आगा, जमालपुर, सेन चौक, मियां की सराय, खड़खड़ी मोहल्ला, माली टिबा, बावड़ीपुर, बड़ का कुआं, मिश्रवाड़ा, संघीवाड़ा, दया नगर, केशव नगर और कैलाश नगर में जलभराव हो गया। पुल बाजार, डॉ. नरूला की कोठी के सामने मोहल्ला चांदूवाड़ा, पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के सामने, पुलिस लाइन के सामने, पुरानी अनाज मंडी, लोहा मार्केट, मानक चौक, महावीर मार्ग पर जलभराव हो गया। जिला उपायुक्त आवास परिसर में भी पानी भर गया।
शहर में जलनिकासी के लिए एक मात्र छलक नाला है। इस नाले को करोड़ों रुपये खर्च कर नये सिरे से पक्का बनाया जा रहा है लेकिन तीन वर्षों से नाले का काम धीमी गति से चल रहा है। अभी तक नाले 60 प्रतिशत ही काम हुआ है। उल्लेखनीय है कि वीरवार को 20 एमएम बारिश हुई थी।
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जलनिकासी में लगाए गए 40 कर्मचारी
नगर परिषद की ईओ सुमन लता ने बताया कि बारिश रुकने के बाद उन्होंने छलक नाला, मोडा वाला मंदिर के पीछे का रास्ता, सेन चौक, मो. रावका आदि स्थानों का निरीक्षण किया। शहर के मोहल्लों में जलनिकासी के लिए 40 कर्मचारी लगाए गए हैं। सेन चौक पर कुछ दिनों पहले ही पाइप लाइन डाली गई थी। इसके ऊपर साइड में लगे होल खुलवाए जा रहे हैं। जहां भी दिक्कत चल रही है वहां कर्मचारी लगाए गए हैं। सैनी धर्मशाला के पास जेसीबी लगाई गई ताकि पानी की निकासी की जाए।
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खेतों में तैरने लगीं बाजरा की बालियां
क्षेत्र में हुई बारिश से खेतों में भी पानी भर गया और काट कर रखी गईं बाजरे की बालियां तैरने लगीं। कपास के खेतों में पानी भरने से नुकसान की आशंका है। मौसम विभाग ने दो दिन तक बारिश होने की आशंका जताई है। जिले में 1.10 लाख हेक्टेयर में बाजरा तथा 21 हजार हेक्टेयर में कपास बोयी गई थी। इस समय फसल की कटाई का मौसम चल रहा है। अधिकतर किसानों ने बाजरे की फसल काट कर खेतों छोड़ दिया है। कुछ किसान बाजरा की फसल काटने की तैयारी में थे जबकि कपास की दो बार तुड़ाई हो चुकी है। बारिश से किसान चिंतित हैं।
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कपास और बाजरा को होगा नुकसान
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एसडीओ डॉ. अजय कुमार ने बताया कि बारिश से कपास व बाजरे की फसल को नुकसान हो सकता है। खेतों में काट कर रखी गई बाजरे की फसल भीग गई है। ऐसे में फसल खराब हो सकती है। उन्होंने बताया कि गर धूप नहीं खिली तो अधिक नुकसान हो सकता है। पकी खड़ी बाजरे की फसल को बारिश से कोई नुकसान नहीं है। कपास के खेत में पानी भरा रह गया तो नुकसान हो सकता है।
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