महेंद्रगढ़। लुवास और लोक निर्माण विभाग के बीच आपसी तालमेल के अभाव के चलते 10 करोड़ रुपये की लगात से 11 एकड़ में बना रीजनल सेंटर दो साल से उद्घाटन के इंतजार में कंडम होने की कगार पर पहुंच चुका है।
दक्षिणी हरियाणा के छह जिलों के साथ-साथ राजस्थान के चार जिलों के फायदेमंद साबित होने वाली यह परियोजना जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। दो वर्ष पूर्व रिवासा की पंचायती भूमि पर लुवास के रीजनल सेंटर का काम 90 प्रतिशत पूरा हो गया था, लेकिन अब दो साल से काम बंद होने के कारण 11 एकड़ में बनाए गए आधुनिक भवनों की दीवारों में दरारें आनी शुरू हो गई हैं।
2016 में हुई थी घोषणा, मार्च 2018 में शुरू हुआ था काम, दिसंबर 2020 तक होना था पूरा
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2016 में अपनी पहली पारी के दौरान महेंद्रगढ़ की सब्जी मंडी में लुवास के गांव रिवासा में बनने वाली रीजनल सेंटर का शिलान्यास किया था। मार्च 2018 में तत्कालीन शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था।
प्रथम चरण में लुवास की ओर से 7.40 करोड़ रुपये की राशि लोक निर्माण विभाग के खाते में डाली गई थी। मार्च 2018 में शुरू हुआ काम दिसंबर 2020 में पूरा होना था लेकिन कोरोना संकट के कारण इसकी समय सीमा बढ़ा दी तो फरवरी 2022 में इसका 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था। प्रदेश सरकार की ओर से एनहासमेंट किया गया जिसके बाद ठेकेदार ने टेंडर के अनुसार राशि बढ़ा दी तथा 3.50 करोड़ रुपये की मांग की। लुवास की ओर से 1.50 करोड़ की राशि लोक निर्माण विभाग के खाते में जमा करा दी। अब दो साल से काम बंद होने के कारण चारों भवनों की दीवारों में दरारें आनी शुरू हो गई हैं। नारनौल-महेंद्रगढ़ के अलावा भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, रेवाड़ी, गुरुग्राम, मेवात तथा राजस्थान प्रदेश के साथ लगते जिला झुंझुनू, अलवर, कोटपुतली-बहरोड, सीकर आदि जिलों के पशुपालकों के लिए यह परियोजना वरदान साबित होनी थी, लेकिन लुवास व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है।
छह साल से सुविधाओं के अभाव में रिवासा पंचायत घर में चल रहा काम:
रिवासा की ग्राम पंचायत ने मार्च 2018 में एक साल का एग्रीमेंट कर लुवास के रीजनल सेंटर को पंचायत घर में शुरू कराया था। इसके बाद पंचायत की ओर से न ही तो एग्रीमेंट को बढ़ाया गया और न ही पंचायत घर को खाली कराया गया। छह साल से लुवास का रीजनल सेंटर पंचायत घर में चल रहा है जिसके कारण सुविधाओं के अभाव में तैनात चिकित्सक एवं वैज्ञानिक भी परेशानी उठाने को मजबूर हैं।
लाखों रुपये की खरीदी थी मशीनें भेज दीं हिसार व नारनौल
लुवास की ओर से जारी किए गए बजट में 10 लाख रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीन, 5 लाख रुपये में खून जांच की मशीन, 10 लाख रुपये की लागत से बायोकेमिकल एनालाइजर मशीन सहित अनेक उपकरण खरीदे थे। लेकिन जिम्मेदारों ने स्थाई भवन को पूरा कराने की बजाए मशीनों को हिसार व नारनौल भेज दिया। साथ ही दो वैज्ञानिकों एवं तीन डीसी रेट कर्मचारियों व एक स्थाई कर्मचारी का स्थानांतरण नारनौल कर दिया। जबकि नियमित रूप से इनका वेतन रिवासा सेंटर से दिया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले तीन सालों से पॉलिथीन में बंद है जिसकी गारंटी-वारंटी समाप्त हो चुकी है।
प्रदेश के अन्य जिलों में रीजनल सेंटर का युद्ध स्तर पर चल रहा काम
लुवास की ओर से प्रदेश के अन्य जिलों में बनाए जा रहे रीजनल सेंटरों का नियमित रूप से युद्ध स्तर पर काम चल रहा है जबकि महेंद्रगढ़ रीजनल सेंटर की ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। बता दें कि लुवास की ओर से जिला भिवानी के गांव बहल, कैथल जिला के गांव क्योडक, माखोसरानी जिला सिरसा, लकड़िया जिला झज्जर में नियमित रूप से काम चल रहा है। लुवास के वीसी महेंद्रगढ़ जिले के होने के बावजूद भी यहां के पशुपालक इन सुविधाओं से वंचित हैं।
सुविधाओं के अभाव में लाचार हैं चिकित्सक:
रिवासा के पंचायत घर में चल रहे रीजनल सेंटर पर प्रतिदिन 200 से अधिक पशुपालक सलाह लेने पहुंच रहे हैं। साथ ही प्रतिदिन पांच से सात ऑपरेशन, हर माह औसतन 15 बड़े स्तर के ऑपरेशन के साथ-साथ 80 से अधिक ओपीडी हो रही हैं। वहीं सुविधाओं के अभाव में करीब 6 चिकित्सक एवं पशु वैज्ञानिकों के साथ-साथ 22 सहायकों का स्टाफ सुविधाओं के अभाव में लाचार नजर आ रहा है।
इस परियोजना के लिए रिवाइज कोस्ट 11.52 करोड़ रुपये का एस्टिमेट गत जनवरी माह में भेजा हुआ है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर से इसे मंजूरी मिलने के बाद काम पुन: शुरू करा दिया जाएगा। सरकार की ओर से स्वीकृति मिलते ही शेष काम या तो उसी एजेंसी से कराया जाएगा या नया टेंडर जारी कर इसका कार्य पूरा कराया जाएगा। इससे अलावा पूर्व भी करीब डेढ़ वर्ष पहले रिवाइज एस्टीमेट भेजा गया था जिसके बाद सरकार की ओर से कुछ निर्देश सरकार द्वारा दिए गए थे।
- अश्वनी कुमार, अभियंता लोक निर्माण विभाग
इस परियोजना को पूरा करने के लिए उनकी ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही सरकार इस परियोजना को पूरा करेगी। उनके कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने इसका शिलान्यास किया था। उन्होंने स्वयं भूमि पूजन कर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था। मुख्यमंत्री से जल्द ही मुलाकात कर इस निर्माण कार्य को पूरा कराया जाएगा।
- प्रो. रामबिलास शर्मा, पूर्व शिक्षामंत्री