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दो महीने से पानी को तरस रहे खरकड़ा के ग्रामीण, नारेबाजी कर जताया विरोध

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Villagers of Kharkada, who have been craving water for two months, raised slogans and protested - फोटो : Narnol
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गांव खरकड़ा (आकोदा) में पिछले दो महीने से पीने के पानी के लिए जूझ रहे ग्रामीणों ने नारेबाजी कर अपना विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं को सिर पर पानी लाना पड़ता है। पेयजल की लाइन होने के बाद भी यहां पानी की आपूर्ति नहीं दी जा रही।
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गांव खरकड़ा में पहाड़ी की तलहटी में अनुसूचित वर्ग के लोगों की कालोनी बसी हुई है। गांव के निवासी सतबीर, होशियार सिंह , कोयल, लाली, मीना, जीवनी,दया, विद्या, भतेेरी, रिसासा, ओमपति, संतोष, ईशवंती, रीना, सुमन, सरोज, संतोष ने बताया कि यहां करीब 100 से 125 परिवारों के करीब 500 लोग रहते हैं। आकोदा के जलघर से बस्ती के लिए पाइप लाइन होने के बावजूद पानी की आपूर्ति नहीं दी जा रही है। जलघर की एक लाइन में नहरी पानी की आपूर्ति होती थी। इसके अलावा दूसरी लाइन के जरिये बोरवेल का पानी गांव में सप्लाई होता था। पिछले करीब दो महीने से यहां पानी की आपूर्ति पूरी तरह से बंद है। ग्रामीणों ने बताया कि अनुसूचित वर्ग के करीब 200 परिवारों को पीने के पानी के लिए एक से दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। महिलाएं सिर पर पानी लेकर आती हैं। इस बस्ती के अधिकतर लोग मजदूरी कर अपना परिवार पालते हैं। दिन भर मजदूरी करने के बाद उन्हें शाम को आकर अपने घर के लिए पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रदेश सरकार एक ओर हर घर नल की बात कर रही है। दूसरी ओर गांव के लोगों को सार्वजनिक नलों के जरिए भी पानी नहीं दे रही।
गांव खरकड़ा में पानी आपूर्ति के लिए दो बोरवेल थे। दोनों खराब हो चुके हैं। नहर में कई दिन बाद पानी आया है। अब जलघर को भरा गया है। ठेकेदार तथा जनस्वास्थ्य विभाग से कोई विवाद चल रहा है। जिस कारण ठेकेदार के कर्मी पानी की आपूर्ति चालू नहीं कर रहे। कई बार जनस्वास्थ्य विभाग को अवगत करा चुके हैं।
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धर्मेेंद्र, सरपंच प्रतिनिधि, खरकड़ा-आकोदा

Villagers of Kharkada, who have been craving water for two months, raised slogans and protested- फोटो : Narnol

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