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Mahendragarh-Narnaul News: 2.38 लाख गाय-भैंस का चल रहा वैक्सीनेशन, 66 टीमें जुटीं

Wed, 13 Nov 2024 08:05 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो नंबर-02नारनौल के रेवाड़ी ​​रोड ​स्थित पशु अस्पताल।
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नारनौल। पशुपालन और डेयरी विभाग की और से जिले में मौजूद गाय व भैंस में होने वाली मुंहखुर व गलघोंटू जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है।
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इस अभियान के तहत जिले की सभी गाय व भैंस को वैक्सीन देने का काम 30 नवंबर तक जारी रहेगा। इसके लिए विभाग के कर्मचारी व अधिकारियों ने अपनी कमर कस ली है और अलग अलग गठित 66 टीमें जिले के प्रत्येक गांव, कस्बा, ढाणी व शहर में जाकर मवेशी को वैक्सीन लगाने का काम कर रही हैं।
क्या है मुंहखुर व गलघोंटू
पशु चिकित्सक ने बताया कि यह दोनों ही बीमारी जानलेवा हैं और एक पशु से दूसरे में संक्रमण से फैलती है। मुंहखुर के कारण पशु का दूध सूख जाता है, तेज बुखार के साथ मुंह में छाले व लगातार लार गिरती रहती है व पशु लंगड़ा कर चलने लगता है। साथ ही गलघोंटू की वजह से पशु के गले में सूजन, तेज बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ होती है और समय पर उपचार न मिलने के कारण पशु की मौत हो जाती है।
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कितनी है गाय भैंस की संख्या
जिले में पशुपालकों के पास 1,88,000 भैंस व 49,800 गाय हैं। इस प्रकार दोनों को मिलाकर इनकी संख्या 2,38,000 के करीब है। इन सभी की वैक्सीनेशन का कार्य चल रहा है और प्रत्येक 6 माह के बाद फिर से वैक्सीन दी जाती है। इसके अलावा 4 से 8 माह तक के छोटे पशु को हर डेढ़ माह में बूस्टर डोज दी जाती है। 7 माह से ऊपर के गर्भवती पशु, बीमार व बहुत कमजोर पशुओं को वैक्सीन नहीं दी जाती है।
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पशुपालकों से अपील है कि टीका अवश्य लगवाएं, ताकि इन जानलेवा बीमारी से मवेशी को बचाया जा सके। आमतौर पर पशुपालकों में ये भ्रांति है कि टीका लगने से दूध सूख जाएगा, जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है। हालांकि टीकाकरण के बाद मवेशी को हल्का सा बुखार आ सकता है, जो एक ही दिन में उतर जाता है। टीका लगने के बाद मवेशी को एक दो दिन तक गुड़ का सेवन कराएं, इससे उसे ताकत मिलेगी।
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चंद्रभान सोनी, उपनिदेशक, डेयरी व पशुपालन विभाग नारनौल।
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