फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विकास या विनाश: उष्मापुर में ब्लास्टिंग से कांप उठा गांव, खनन ने छीना चैन; अधिकांश मकानों में आईं दरारें

Tue, 30 Dec 2025 01:53 PM IST
शाहिल शर्मा मनोज राजपूत/रबिन वर्मा, महेंद्रगढ़

सार

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में अरावली पहाड़ियों पर खनन से उष्मापुर  गांव के लोग बहुत परेशान हैं। आलम यह है कि पहाड़ियों पर खनन के लिए हो रहे  ब्लास्ट से कई घरों में दरारें आ गई हैं। वहीं, लोगों को सांस और अन्य तरह की बीमारियां हो रही हैं।  डिटेल में पढ़ें खबर...
विज्ञापन
उष्मापुर गांव में अरावली पहाड़ियों पर किया जा रहा ब्लास्ट - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गांव उष्मापुर के क्रशर जोन में 24 घंटे में हो रहे 12 ब्लास्ट और सामग्री लेकर निकल रहे 900 से अधिक डंपर अरावली श्रृंखला को खोखला कर रहे हैं। यहीं नहीं ग्रामीणों का जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है और अब तो उनका गांव में रहना व सांस लेना भी मुश्किल हो चुका है। गांव उष्मापुर में करीबन 250 घर हैं और लगभग 2000 की आबादी है। गांव से 350 मीटर की दूरी पर अरावली श्रृंखला है। गांव के प्रवेश और निकास द्वार पर क्रशर जोन है। 
विज्ञापन


डेढ़ साल से कंपनी कर रही खनन

ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन 4 बार ब्लास्ट किए जाता हैं और इसमें हर एक बार 3 ब्लास्ट किए जाते हैं। ब्लास्ट की आवाज पूरे दिन ग्रामीणों के कानों में गूंजती है और इससे उनका चैन भी छिन गया है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2016 में पहाड़ की नीलामी हुई थी और इस दौरान 33.10 हेक्टेयर भूमि पर खनन की अनुमति दी गई। नीलामी के बाद खनन कंपनी ने कोई काम नहीं किया और अब डेढ़ साल पहले ही कंपनी ने खनन कार्य शुरू किया है। 

लोगों को हो रही गंभीर बीमारियां

ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी अंधाधुंध खनन कर रही है और अरावली की इस चोटी को तय सीमा से अधिक दूरी तक खत्म कर दिया है। ग्रामीणों की ओर से इस बारे में पंचायत कर खनन कार्य बंद करवाने का निर्णय लिया ताकि ग्रामीणों को चैन मिल सके और उनका जीवन प्रभावित न हो। हर ब्लास्ट के बाद धूल के गुब्बार उड़ रहे हैं और धूलकण हवा के साथ गांव में पहुंच रहे हैं। गांव में लोगों को सांस की बीमारी हो चुकी है और उनका सांस लेना भी अब दूभर हो गया है। प्रतिदिन उड़ रहे धूल के गुब्बार ग्रामीणों की सांसें फूला रहे हैं।
विज्ञापन

ब्लास्ट से घरों में आई दरारें - फोटो : संवाद

नीलामी के दौरान भी हुआ था विरोध

ग्रामीणों ने बताया कि नीलामी का ग्रामीणों को पता नहीं था और इस दौरान गांव के करीबन 20 लोग ही पहुंचे थे। ठेकेदार व अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने विरोध किया था, लेकिन उस दौरान अधिकारियों व चुनिंदा लोगों ने विरोध करने वाले ग्रामीणों को मौके से जाने के लिए कह दिया और केवल 20 लोगों के हस्ताक्षर के आधार पर ही नीलामी कर दी गई।

 गांव के 250 में से अधिकांश घरों में आई दरारें 

गांव में करीबन 250 घर हैं और इनमें से अधिकांश घरों में दरारें आई हुई हैं। ग्रामीणों ने बताया कि धमाके के साथ पूरा पहाड़ कांपता है और घरों में भी कई बार जबरदस्त कंपन होता है। इससे घरों में दरारें आ चुकीं हैं और कुछ दीवारों में तो मलबा भी झड़ रहा है। ग्रामीण अनिल कुमार, कमलेश, मुकेश, कुसुमलता, सुरेश देवी आदि ने बताया कि धमाकों से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है और पशु-पक्षी भी अचानक चहक उठते हैं।

गांव में खनन से उड़ रही धूल मिट्टी - फोटो : संवाद
 जानिये ग्रामीणों की परेशानी, उन्हीं की जुबानी: 
धमाके से गाय व भैंसों का गर्भ नहीं रुक रहा है और अचानक धमाके से पशुओं का गर्भपात हो जाता है। किसानों को आर्थिक नुकसान होता है और साथ ही पशुओं को भी परेशानी होती है। मुकेश देवी, ग्रामीण

ब्लास्ट के बाद उड़ने वाली धूल गांव में आती है और घर व फसलों पर जम जाती है। धूल जमने से फसल भी खराब हो रही है और किसान लगातार घाटे में जा रहा है। घर में बार-बार सफाई करनी पड़ती है। -कुसुमलता, ग्रामीण

ब्लास्ट से जर्जर हुए घर - फोटो : संवाद
मेरा मकान नया बनाया हुआ है और डेढ़ साल में धमाकों के कारण इसमें काफी दारारें आ चुकी हैं। अब तो हालात ऐसे बनें हैं कि कभी भी दीवार से मलबा गिर जाता है। ग्रामीणों का जीवन अब संकट में है। - कमलेश देवी, ग्रामीण

दिन-रात चल रहे क्रशर की आवाज न सोने देती है और न ही आराम से रहने देती है। अंदर रहते हैं तो मलबा गिरने का डर रहता है और बाहर आएं तो धमाके व धूल परेशान करते हैं। - सुरेश देवी, ग्रामीण

प्रतिदिन गांव से ओवरलोड डंपर चलते हैं और लोगों का सड़क से निकलना मुश्किल हो गया है। कई बार मैं चोट खाने से बचा हूं। चलते डंपर से पत्थर निकलकर साइड गिर जाते हैं। इससे राहगीर चोटिल हो सकते हैं। ग्रामीणों की ओर से ठेकेदार को समझाया गया है, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। अब ग्रामीण प्रतिदिन घुट-घुट कर जीवन जी रहे हैं। कंपनी की ओर से अवैध खनन किया जा रहा है और इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। - अनिल कुमार, ग्रामीण

दिन में होते हैं पहाड़ियों पर 12 ब्लास्ट - फोटो : संवाद
अरावली केवल पहाड़ नहीं हमारी जीवन रेखा : कृष्ण राव

युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्ण राव ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि हमारी जल, वायु, पर्यावरण और जीवन की रक्षा करने वाली जीवन रेखा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सुभाष पार्क से लघु सचिवालय तक ‘अरावली बचाओ अभियान’ के तहत विरोध मार्च निकाला और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। नांगल चौधरी से विधायक मंजू चौधरी, युवा कांग्रेस अध्यक्ष पुनीत बलान, रेवाड़ी युवा कांग्रेस अध्यक्ष राज प्रकाश सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
 
विज्ञापन

ब्लास्ट के बाद पहाड़ी से उड़ती धूल मिट्टी - फोटो : संवाद
अरावली रहेगी, तभी हम सुरक्षित रहेंगे : सुमन लता

अरावली बचाओ आंदोलन की ओर से नेताजी सुभाषचंद्र बोस पार्क में आयोजित सम्मेलन में पर्यावरण प्रेमी सुमन लता ने कहा कि अरावली का अस्तित्व रहेगा तभी हमारा अस्तित्व सुरक्षित रहेगा। सम्मेलन में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि अरावली की नई परिभाषा लागू हुई तो क्षेत्र धीरे-धीरे मरुस्थल में तब्दील हो जाएगा। किसान नेता रामकुमार ने कहा कि अरावली वर्षा आकर्षित करने, जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज में अहम भूमिका निभाती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें