फोटो 26जुतों को पॉलिश करता उमराव। संवाद
निजामपुर। आधुनिक दौर में जहां हर कोई बड़ी नौकरी और आरामदायक जीवन की तलाश में भाग रहा है, वहीं एक साधारण मोची अपनी मेहनत, ईमानदारी और हुनर से समाज के लिए मिसाल बना हुआ है।
देवीलाल चौक के पास फुटपाथ पर पिछले 25 वर्षों से जूते-चप्पल ठीक करने का काम कर रहे मौखूता निवासी 52 वर्षीय उमराव रोज सुबह अपनी छोटी सी दुकान सजाते हैं। सीमित साधनों और बिना महंगे औजारों के बावजूद उनका हुनर ऐसा है कि पुराने और कटे फटे जूतों को भी नया जैसा बना देते हैं।
उन्होंने यह काम अपने पिता से सीखा था। वे कहते हैं, पहले लोग जूते ज्यादा ठीक कराते थे लेकिन अब सस्ते नए जूते मिलने से काम कम हो गया है। दिनभर में कभी 200 तो कभी 300 रुपये की ही आमदनी हो पाती है। ग्राहक सुरेंद्र ने बताया कि आज के समय में ऐसे मेहनती और सच्चे कारीगर बहुत कम मिलते हैं जो कम पैसे में इतना अच्छा काम करते हैं। संवाद