हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस सर्विसेज एसोसिएशन के बैनर तले जिला भर के चिकित्सक शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। इसकी चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। इस दौरान, आयुर्वेदिक, होम्योपेथिक, एनएचएम के तहत लगी गायनोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट चिकित्सक व पीजी कर रहे डॉक्टरों ने ओपीडी को संभालने की कोशिश की।
हड़ताल के बाद भी 35 हुए ऑपरेशन
नागरिक अस्पताल में नेत्र रोग, हड्डी रोग, बच्चों की ओपीडी के मरीजों ने वैकल्पिक चिकित्सकों से उपचार लिया, लेकिन ज्यादातर मरीज बिना उपचार के ही लौट गए। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन होने वाले हड्डी संबंधित ऑपरेशन नहीं हो सके। इससे मरीजों को निजी अस्पतालों में उपचार लेना पड़ा। हालांकि चिकित्सकों ने मानवता दिखाते हुए शुक्रवार को करीब 35 सिजेरियन ऑपरेशन किए। इससे गर्भवती महिलाओं के परिजनों को थोड़ी राहत मिली।
फोरेंसिक चिकित्सक के हड़ताल पर हाेने के बाद भी हुआ पोस्टमार्टम
चिकित्सकों की हड़ताल में फोरेंसिक चिकित्सक के शामिल होने के बाद परेशानी बढ़ सकती थी। लेकिन नारनौल के नागरिक अस्पताल में आए एक शव का फोरेंसिक एक्सपर्ट उप सिविल सर्जन डॉ. हर्ष चौहान ने पोस्टमार्टम किया।
1500 के पास रहती है ओपीडी, आमजन प्रभावित :
नारनौल के नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1500 के पास ओपीडी रहती है। लेकिन शुक्रवार को चिकित्सकों की हड़ताल होने की वजह से नेत्र रोग, हड्डी रोग, मनोरोग सहित अनेक ओपीडी प्रभावित होने से अस्पताल में आने वाले ज्यादातर मरीजों को निराश होकर घर वापिस लौटना पड़ा। इसके अलावा नांगल चौधरी, अटेली सहित सभी सीएचसी व पीएचसी पर आने वाले मरीज भी परेशान होकर लौट गए।
यह बोले मरीजवह राजस्थान के गांव काकड़ा से अपना पैर दिखाने के लिए आया था। काफी देर हो गई बाहर बैठे कोई चिकित्सक नहीं आया। उनके पैर में बहुत तेज दर्द हो रहा है। अब वह करीब 20 किलोमीटर दूर से आया है। चिकित्सक के नहीं मिलने से बहुत ज्यादा परेशानी हुई है।
इंद्राज, काकड़ा राजस्थान।
उसे पैर पर पट्टी करवानी थी, इसके लिए भी अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं मिल रहा है। केवल एक ही कक्ष में चिकित्सक बैठे है, जहां बहुत भीड़ लगी हुई और लोगों का नंबर नहीं आ रहा है। सभी मरीज परेशान हो रहे है। मरीजों को पता ही नहीं था कि हड़ताल है।
शिवचरण, नारनौल।
अपनी पत्नी का कान दिखाने के लिए नागरिक अस्पताल में आया था। पर्ची तो कटवा ली है परंतु कान देखने के कोई डाक्टर नहीं है। लोगों की सुविधा को देखते हुए चिकित्सकों को हड़ताल नहीं करनी चाहिए और अगर हड़ताल करे तो प्रशासन को इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। अस्पताल में मरीज ज्यादा आ रहे और डाक्टर बहुत ही कम है।
शरीफ, बोचड़िया।
चिकित्सकों को हड़ताल खत्म कर कार्य पर वापिस लौट जाना चाहिए ताकि मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि हड़ताल पर चिकित्सक जाने की वजह से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, जो मरीजों को उपचार दे रहे हैं।
डॉ. रमेश चंद्र आर्य, सिविल सर्जन, नारनौल।