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बेतरतीब ट्रैफिक को संभाले कौन

Thu, 06 Aug 2015 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला नारनाैल
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पूरे विश्व ने जहां बुधवार को पहली इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट की 101वीं वर्षगांठ मनाई वहीं शहर का आलम यह है कि लोगों की सुविधा के लिए लगाईं ट्रैफिक लाइटों ने कभी ‘राइट’ सिग्नल नहीं दिया। जब देखो लाइट खराब ही मिलती हैं और ट्रैफिक व्यवस्था अस्त-व्यस्त। इससे शहर के मुख्य चौराहों पर जाम लगने से आए दिन हादसे होते हैं और झगड़े का कारण बनते हैं। लोगों को आए दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका मुख्य कारण बेतरतीब यातायात है। यातायात को संभालने वाला पूरा सिस्टम ही गड़बड़ाया पड़ा है।
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शहर में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए दो चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। वर्तमान में दोनों ही सिग्नल ही ठप पड़े हैं। सिग्नल को सुधारने के लिए नगर पालिका ने ठीक करवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। राव तुलाराम चौक पर लगे सिग्नल तो सिर्फ फेल है लेकिन मालड़ा चुंगी पर लगा सिग्नल तो टूट चुका है।

स्टाफ बिन कैसे कंट्रोल हो ट्रैफिक
यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए जिले में ट्रैफिक पुलिस के पास स्टाफ ही नहीं है। पूरे शहर के ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए दो पुलिसकर्मी ही जूझते रहते हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए कम से कम 6 पुलिसकर्मी शहर में तैनात होने चाहिए। वहीं वीआईपी मूवमेंट के दौरान तो हालत और भी खराब हो जाती है। जवानों की कमी भी जाम का कारण बन रही है।
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इंडिकेटर हैं नहीं, चलती है मनमर्जी
शहर में दौड़ रहे अधिकांश ऑटो पर तो इंडिकेटर नहीं है। ऑटो किसी दिशा में जाएगा, इसकी कोई जानकारी पीछे चल रहे वाहन चालक को नहीं होती। इस कारण हादसों का डर बना रहता है। ऑटो पर अभी तक ट्रैफिक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
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