महेंद्रगढ़। जिले में ओवर स्पीड से होने वाले हादसों को रोकने के लिए हाईवे 152-डी के अलावा किसी भी सड़क पर स्पीड मापने के लिए मीटर नहीं हैं। ऐसे में ओवर स्पीड से होने वाले हादसों को रोकना किसी चुनौती से कम नहीं है। जिले में वाहनों की स्पीड मापने के लिए यातायात पुलिस की महज दो इंटर सेप्टर गाड़ियों का सहारा है।
वहीं यातायात पुलिस ने चार दिनों में 109 वाहनों के ओवर स्पीड के चालान किए हैं जिनमें से वीरवार को 19, शुक्रवार को 21, शनिवार को 30 व रविवार को 39 ओवर स्पीड के चालान किए गए हैं।
जिले की सड़कों पर स्पीड मीटर नहीं होने से वाहन चालकों को ओवर स्पीड पर किसी भी प्रकार के चालान या कार्रवाई का भय नहीं है। स्पीड मीटर नहीं होने से सड़कों पर लगे संकेतकों पर अंकित निर्धारित गति पर वाहन चालक ध्यान नहीं देते हैं जिसके कारण हादसों का भय बना रहता है।
वहीं यातायात पुलिस की ओर से रेवाड़ी-नारनौल सड़क मार्ग पर 80 किलोमीटर प्रति घंटा, स्टेट हाईवे 148-बी पर 70 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड निर्धारित की गई है लेकिन इन सड़कों पर बेलगाम ओवर स्पीड दौड़ने वाले वाहनों की स्पीड जांच के लिए स्पीड मीटर तक नहीं हैं।
सड़कों पर ट्रेफिक लाइटों का अभाव
यातायात नियंत्रण करने के लिए स्टेट हाईवे 148-बी, महेंद्रगढ़-रेवाड़ी, महेंद्रगढ़-अटेली, महेंद्रगढ़-सतनाली किसी भी सड़क पर ट्रेफिक लाइटें तक नहीं हैं। ऐसे में ओवर स्पीड सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों से कोहरे के मौसम में हादसों का भय बना रहता है। हालांकि यातायात पुलिस की ओर से लगातार दो इंटर सेप्टर वाहनों की सहायता से लगातार ओवर स्पीड पर निगरानी कर चालान किए जा रहे हैं।
- वर्जन:
जिला यातायात पुलिस के पास दो इंटर सेप्टर वाहन हैं। इंटर सेप्टर गाड़ियां 700 मीटर दूरी से ही स्पीड माप लेती है। तय स्पीड से अधिक पाए जाने पर वाहन का चालान भी किया जाता है। कोहरे के मौसम में हादसों को रोकने के लिए लगातार पुलिस टीमें मुख्य सड़कों पर गश्ती करती हैं। -अनिल कुमार, जिला पुलिस यातायात प्रभारी