नारनौल। मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के तहत राज्य सरकार की शहरों में मालिकाना हक देने की योजना महेंद्रगढ़ जिले में सिरे नहीं चढ़ पा रही है। पूरे जिले से अब तक केवल दो लोगों की ही फाइल अप्रूव हुई है और वह भी नारनौल नगर पालिका क्षेत्र की। बाकी दो की फाइल पर ऑब्जेक्शन लगा है। उनमें रेट गलत चढ़ गए। इसके चलते उनकी फाइल को दोबारा भेजा जाएगा। महेंद्रगढ़ जिले में स्थानीय शहरी निकाय निदेशालय की कुल 1314 प्रॉपर्टी है। इनके लिए 372 लोगों ने आवेदन किया। इसमें से केवल 10 की फाइल ही अप्रूवड हो सकी है। यह सभी फाइल भी नारनौल नगर परिषद एरिया के दुकानदारों की है। इन 10 में से भी मुख्यालय स्तर पर चार लोगों की फाइल गई, जिन द्वारा राशि जमा करवाई गई थी, लेकिन इसमें भी दो लोगों की फाइल में रेट गलत लिखने की वजह से ऑब्जेक्शन लग गया। इसके चलते उसे मुख्यालय ने वापस भेज दिया। दोबारा से उनकी फाइल भेजी जाएगी। बाकी छह केस को भी जल्द भेजा जाएगा। यहां बता दे कि मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के तहत सरकार द्वारा नगर परिषदों और नगरपालिकाओं की दुकानों या दूसरी प्रापर्टी पर 31 दिसंबर, 2020 तक 20 साल या इससे अधिक समय से किराये पर बैठे दुकानदारों को मालिकाना हक देने की योजना हैं। इसके लिए नगर परिषद नारनौल, अटेली मंडी, कनीना, नांगल चौधरी, महेंद्रगढ़ नगर पालिका के अधीन आने वाले किरायेदारों से आवेदन मांगे गए थे।
136 फाइल को किया गया रिजेक्ट, 226 फाइलों पर अभी फैसला होना बाकी
फाइलों में कमी होने के चलते जिले भर से अब तक 136 फाइलों को रिजेक्ट कर दिया गया है। इसके अलावा 226 फाइलों पर फैसला लिया जाना बाकी है। प्रापर्टी की बात करें तो नगर परिषद नारनौल के अधीन सबसे ज्यादा 460 प्रॉपर्टी है। उसके बाद कनीना नगर पालिका के अधीन 338 प्रॉपर्टी हैं।
स्वामित्व योजना के तहत नारनौल नगर परिषद के तहत चार फाइल भेजी गई थी। इनमें से दो पर ऑब्जेक्शन लग गया था। उसे दोबारा भेजा जाएगा। अटेली मंडी में भी दो फाइल आई थी, लेकिन कमी के कारण वह रिजेक्ट हो गई थी।
-अनिल कुमार, सचिव, नगर परिषद, नारनौल