नारनौल। गांव दौचाना में अटल भूजल योजना के तहत लगभग 742.9 लाख लीटर क्षमता का पानी का टैंक बन गया है। इससे ग्रामीणों को अब सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।
1.25 करोड़ रुपये की लागत से तकरीबन 5 एकड़ क्षेत्र में टैंक निर्माण किया गया है। टैंक 15 फीट गहरा है। टैंक में लगभग 742.9 लाख लीटर पानी को जमा किया जा सकता है। इससे गांव की करीब 307 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल पाएगा। टैंक के तल में सीमेंट का फर्श बनाया गया है और चारों और दीवारें बनाई गई है।
सुरक्षा के मद्देनजर टैंक के चारों तरफ तार की बाड़ लगाई गई है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन संदीप ने बताया कि खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि चाहे खेत पास हों या दूर, हर किसान को समय पर और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। उन्होंने बताया कि टैंक के पास एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इससे अलग-अलग लाइनों के लिए निर्धारित समय पर पानी छोड़ा जाएगा।
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अटल भूजल योजना का लक्ष्य जल संकट को दूर करना है। क्षेत्र में स्थायी भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देना है। जिला महेंद्रगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यह शानदार प्रोजेक्ट है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा।-डॉ. विवेक भारती,उपायुक्त
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गांव में बनाए गए टैंक से करीब 307 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। सभी किसानों को सिंचाई के लिए निशुल्क पानी उपलब्ध करवाया जाएगा। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप बिछाने का कार्य लगभग हो चुका है। कंट्रोल रूम में शिफ्ट में कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। वहीं सिंचाई के लिए पानी सभी किसानों को उपलब्ध हो इसके लिए ग्राम पंचायत द्वारा कमेटी गठित की जाएगी। जो किसानों को पानी की उपलब्धता और उसके प्रयोग के बारे में जागरूक करेगी।-मूलचंद, सरपंच
गांव में कृषि वर्षा आधारित है, लेकिन टैंक बनने के बाद अब गांव में आर्थिक सुधार होगा। सिंचाई के लिए नियमित रूप से पानी उपलब्ध होगा, जिससे फसल की पैदावार अधिक होगी और किसान अधिक मुनाफा कमा पाएंगे।-बीरबल यादव, किसान
टैंक के निर्माण के बाद ट्यूबवेल कनेक्शन जो सूख चुके हैं या जिनका जलस्तर कम हो चुका है, उसमें सुधार होगा। वहीं अब एक साल में किसान रबी व खरीफ फसल दोनों उगा सकते हैं और उसके साथ-साथ सब्जी और अन्य फसल भी उगा सकते हैं।
सुरेश कुमार राजपूत, किसान