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प्रभु से बढ़कर कोई और सुख, संपत्ति या संपदा नहीं : कुलदीप भारद्वाज

Thu, 14 Aug 2025 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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महेंद्रगढ़। गांव खायरा में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को भगवान की भक्ति को लेकर कथा सुनाई गई।
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कथा व्यास कुलदीप भारद्वाज ने बताया कि मनुष्य जीवन विषय वस्तु को भोगने के लिए नहीं मिला है, लेकिन आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़ विषय वस्तु को भोगने में लगा है। उसका सारा ध्यान सांसारिक विषयों को भोगने में ही लगा है। मानव जीवन का उद्देश्य कृष्ण प्राप्ति शाश्वत है।

उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य कृष्ण को पाकर ही जीवन छोड़ना है और अगर हम ये दृढ़ निश्चय कर लेंगे कि जीवन में कृष्ण को पाना ही है तो प्रभु से बढ़कर कोई और सुख, संपत्ति या संपदा नहीं है।
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भगवान की कथा विचार, वैराग्य, ज्ञान और हरि से मिलने का मार्ग बता देती है। राजा परीक्षित के कारण भागवत कथा पृथ्वी के लोगों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। समाज द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं किंतु भगवान के नियम ना तो गलत हो सकते हैं और नहीं बदले जा सकते हैं।
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भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है।

इसके साथ साथ भागवत के छह प्रश्न, निष्काम भक्ति, 24 अवतार श्री नारद जी का पूर्व जन्म, परीक्षित जन्म, कुंती देवी के सुख के अवसर में भी विपत्ति की याचना करती है। जीवन की अंतिम बेला में दादा भीष्म गोपाल का दर्शन करते हुए अद्भुत देह त्याग का वर्णन किया। साथ-साथ परीक्षित को श्राप कैसे लगा तथा भगवान श्री शुकदेव उन्हें मुक्ति प्रदान करने के लिए कैसे प्रकट हुए इत्यादि कथाओं का वर्णन किया।
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