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Mahendragarh-Narnaul News: आईएमटी खुडाना का इंतजार खत्म होने की जगी आस

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फोटो संख्या:60-गांव खुड़ाना में  वह जगह जहां आईएमटी बननी है--संवाद
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महेंद्रगढ़। लंबे समय से आईएमटी खुडाना व महेंद्रगढ़ में सब डिपो शुरू होने का इंतजार कर रहे लोगों को एक बार फिर से बजट में निराशा ही हाथ लगी। लोगों को उम्मीद थी कि वर्ष 2019 में आईएमटी खुडाना के शिलान्यास के सात साल बाद सरकार इसकी सुध लेगी व बजट में विशेष प्रावधान रखकर जिलावासियों को सौगात देने का काम करेगी।
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इसके विपरीत प्रदेश सरकार के बजट में महेंद्रगढ़ का केवल एक ही बार जिक्र किया गया है। वहीं, पर्यटन के रूप में क्षेत्र को पहचान दिलाने वाले महेंद्रगढ़ व माधोगढ़ किलों पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद भी कोई जिक्र तक नहीं किया गया।



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सात साल का सपना रह गया इस बार भी अधूरा



24 फरवरी 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने गांव खुडाना की भूमि पर इसका शिलान्यास किया था। ग्रामीणों की ओर से इस परियोजना के प्रस्तावित 1200 एकड़ भूमि में 1024 एकड़ भूमि ई-भूमि पोर्टल पर अपलोड करा स्वीकृति भी दी है। सात साल में यह परियोजना सात कदम तक नहीं चल पाई है। लोगों को उम्मीद थी कि प्रदेश सरकार जिले के लिए इस महत्वपूर्ण परियोजना पर विशेष बजट का प्रावधान रखकर सौगात देगी, लेकिन क्षेत्र के लोगों को इस बार भी निराशा ही हाथ लगी।
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चार साल से सब डिपो शुरू होने की उम्मीद को भी लगा झटका

महेंद्रगढ़ बस स्टैंड परिसर में 6.70 करोड़ रुपये की लागत से चार साल पूर्व भवन बनकर तैयार होने के बावजूद भी सब डिपो शुरू नहीं हो पाया है। 2019 में शिलान्यास के बाद 2020 में बनकर तैयार सब डिपो के वर्कशॉप का मुख्यमंत्री ने वर्चुअल उद्घाटन किया था। इसके बाद इस भवन में लगातार कमियां निकाली गईं और ठीक कराने के लिए राज्य परिवहन व लोक निर्माण विभाग एक-दूसरे के पाले में गेंद डालते रहे। क्षेत्र के लोगों को प्रदेश सरकार के बजट से उम्मीद थी कि इस सब डिपो को लेकर बजट में प्रावधान रखा जाएगा, लेकिन निराशा ही हाथ लगी।





पर्यटन के रूप में पहचान के अधूरे रह गए सपने



महेंद्रगढ़ क्षेत्र में पर्यटन के रूप में विशेष पहचान दिलाने वाले महेंद्रगढ़ व माधोगढ़ के किलो को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए बजट से काफी उम्मीदें थी। पिछले पांच सालों में इन दोनों किलों के जीर्णोद्धार पर करीब 16 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। लेकिन अभी भी यह अधूरा पड़ा है। बजट से पर्यटन के मामले में क्षेत्र की पहचान बनाने वाले दोनों किलों का कोई जिक्र तक नहीं किया गया। वहीं, लोहारू के किले को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए विशेष प्रावधान रखा गया है।

फोटो संख्या:60-गांव खुड़ाना में  वह जगह जहां आईएमटी बननी है--संवाद

फोटो संख्या:60-गांव खुड़ाना में  वह जगह जहां आईएमटी बननी है--संवाद

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